जिले के ढोलना सिढ़पुरा अमांपुर व अन्य बैंकों पर लोगों ने नकदी न मिलने पर हंगामा कर नारेबाजी की। इस दौरान प्रशासन ने जिन बैंकों में नकदी नहीं थी उन बैंक शाखाओं को बंद करवा दिया। जिलाधिकारी ने आरबीआई से लेकर ग्रामीण बैंक के जनरल मैनेजर तक नकदी की समस्या को लेकर बात की लेकिन हल नहीं निकल सका।
नोट बंदी के बाद से ही जिले में लगातार नगदी की किल्लत बनी हुई है। जिले में बैंक की शाखाओं का पहले से ही अभाव है। पिछले सप्ताह से ढोलना की ग्रामीण बैंक में नकदी का अभाव है। खाता धारक किसान बैंक में चक्कर लगा रहे हैं लेकिन नतीजा नहंीं निकल पा रहा। बैंक परिसर के बाहर कासगंज ढोलना मार्ग पर ग्रामीण किसानों की काफी भीड़ एकत्रित हो गई। पुलिस को जैसे तैसे आक्रोशितों को शांत करना पड़ा। वहीं ढोलना की यूनियन बैंक की शाखा से केवल एक एक हजार की नकदी ही हो सकी। ग्रामीण बैंक सोरों में भी आक्रोशित लोगों के हंगामे को देखकर नकदी के अभाव में बैंक शाखाओं को बंद कराया गया। सिढ़पुरा में भी लोगों ने जमकर नारेबाजी कर आक्रोश जताया तो केनरा बैंक की शाखा को प्रशासन को बंद कराना पड़ा। जिलाधिकारी ने सिढ़पुरा की ग्रामीण बैंक को दस लाख रुपये की नकदी किसी अन्य बैंक शाखा से दिलाई इसके बाद कुछ समय तक बैंक का संचालन हो सका। अमांपुर की केनरा बैंक पर खाता धारकों ने नकदी की मांग को लेकर हंगामा काटा। ग्राहकों ने बैंक में ताले लगवा दिए। जिलामुख्यालय की बैंक शाखाओं में भी नगदी को लेकर राष्ट्रीयकृत बैंक भी जूझते नजर आए। केनरा बैंक की शाखा में अधिकतम चार हजार रुपये की निकासी की गई। इलाहाबाद बैंक की शाखा में दो हजार, बैंक ऑफ बड़ौदा में दो हजार, एसबीआई मुख्य व अन्य शाखाओं से अधिकतम दो हजार रुपये की निकासी जबकि कार्पोरेशन बैंक चार हजार रुपये की निकासी हो रही थी। हंगामे की सूचना पर जिलाधिकारी के विजियेंद्र पांडियन व पुलिस अधिक्षक सुनील कुमार सिंह ने तत्काल शांति व्यवस्था कायम करने के लिए कदम उठाए। लाउड हैलर से बैंक शाखाओं पर एनाउंसमेंट कराके बैंक की नकदी की स्थिति की जानकारी दी और लोगों से शांति की अपील की। वहीं जिलाधिकारी ने बैंक में कैश न होने की स्थिति में शाखाओं को बंद रखने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने आरबीआई को फिर से मेल भेजे वहीं ग्रामीण बैंक के चेयर मेेन, जनरल मैनेजर से भी वार्ता की लेकिन नगदी की उपलब्धता का समाधान नहीं निकल सका।