गंजडुडवारा विकास क्षेत्र के गांव नगला दुर्ग में विकास की बातें तो होती हैं, लेकिन इनको हकीकत के धरातल पर लाने के लिए प्रयास नहीं किए जाते। नतीजतन ग्रामीण आज भी नारकीय जीवन जी रहे हैं। उनकी बदहाल जिंदगी का तारणहार बनने को कोई आगे नहीं आ रहा।
नगला दुर्ग गंगा पार का इलाका है। कादरगंज का पुल पार करने के बाद इस गांव के लिए रास्ता जाता है। गांव की आबादी लगभग दो हजार है। चुनाव चाहें पंचायत स्तर के हों या फिर लोकसभा या विधान सभा के।
इस गांव के विकास की बातें उस समय जोर शोर से होती हैं, प्रत्याशी ग्रामीणों के सामने तमाम वायदे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद सभी बातें भुला दी जाती हैं।
नतीजा यह निकला कि आज भी यह गांव विकास से काफी दूर है। कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों के लिए मकान उपलब्ध कराने को इंदिरा आवास योजना तो लंबे समय से चल रही है।
जबकि पिछले तीन साल से लोहिया आवास योजना भी संचालित है। इसके बाद भी गांव के बाशिंदों के लिए पक्के मकान नसीब नहीं हो सके हैं। अधिकांश ग्रामीण कच्चे मकान में रहकर ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इन ग्रामीणों का दुख दर्द सुनने वाला कोई नहीं है।