शहर का घंटाघर का क्षेत्र हो, अथवा ठंडी सड़क का इलाका। कस्बे के सभी प्रमुख बाजार अतिक्रमण के शिकार हैं। लोगों ने सड़क किनारे बनी नालियां पाट ली है। नालियों के ऊपर, सीढ़ी, चबूतरे ही नहीं मकान तक बना लिया गया है। इसके कारण जलनिकासी नहीं हो पाती। बारिश का पानी सड़क पर भरने के साथ लोगों के घरों में घुसने लगता है। नालियों के इन चंद कब्जेदारों की कारस्तानी मोहल्ले के आम लोगों के साथ राहगीर भी भुगतने को बेबस हैं।
शहर में दिन-ब-दिन अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। किसी भी मार्ग पर निकलें, जलभराव, कीचड़, गंदगी का अंबार मिलेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह नालों पर किए गए कब्जे हैं। कब्जे का आलम यह है कि शहर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर तो कई दुकानें ही नाले पर बनी हुई हैं। पिछले दिनों पालिका ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर नालों की सफाई और अस्थाई कब्जे हटवाए थे, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से नालियां अतिक्रमण की शिकार हो गई। इससे बारिश के पानी की निकासी बाधित है। सड़कों पर जलभराव होता है। ठंडी सड़क, कैलाशगंज रोड, पीपल अड्डा, रेलवे रोड आदि पर तो जरा सी बारिश होते ही जलजमाव हो जाता है। घर, दुकानों में पानी घुसने लगता है। -------
पक्का निर्माण, कैसे हो कार्रवाई
कुछ जगहों पर तो अतिक्रमणकारियों ने नालों के ऊपर पक्का निर्माण करा लिया है। जब पालिका कर्मचारी कार्रवाई के लिए पहुंचते हैं, तो उन्हें कब्जेदारों के विरोध का सामना करना पड़ता है। इससे वे बगैर कब्जा हटाए ही बैरंग लौटते हैं।
------------
नालों पर हो रहे अतिक्रमण को खत्म कराने के लिए जल्द ही अभियान चलेगा। इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। ताकि बारिश के पानी की निकासी हो सके।
संतराम सरोज, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका