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सेहत की बात: आपको भी है मोबाइल की लत तो घेर सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, पढ़ें क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

Thu, 22 Jun 2023 01:27 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, एटा

सार

यदि आपको भी मोबाइल की लत है तो सावधान हो जाइए और इसे सुधार लीजिए। अन्यथा कई खतरनाक बीमारियां घेर सकती हैं। पढ़ें क्या कहते हैं मनोचिकित्सक...
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मोबाइल की लत - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मोबाइल फोन और सोशल मीडिया लोगों को अनिद्रा का शिकार बना रही है। देर रात तक वह मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। अगर मोबाइल नहीं मिले तो नींद आना दूर की बात, बेचैनी महसूस होने लगती है। इस लत से घिरे लोग रात भर करवट बदलते रहते हैं। इससे परेशान दो-तीन लोग प्रतिदिन एटा जिले के मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं।

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मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक राहुल कुमार ने बताया कि मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से सोशल मीडिया पर लोग व्यस्त रहते हैं। ऐसे में वह परिवार के साथ-साथ खुद पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं। धीमे-धीमे वह नींद नहीं आने की समस्या से ग्रसित हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर समय व्यतीत करने के बाद ही नींद आती है। नींद न आना एक गंभीर समस्या है। इससे व्यक्ति मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है।

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बताया कि इस समस्या के शुरूआत में जिद्दी होना और चिड़चिड़ापन नजर आता है। लोग इसे सामान्य बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह समस्या बाद में गंभीर रूप ले लेती है। खासतौर से युवा इसकी चपेट में अधिक आ रहे हैं। उन्होंने बताया कॉलेज में अनिद्रा की शिकायत के प्रतिदिन दो से तीन मरीज आ जाते हैं।

बीमारियों को दे रहे दावत

चिकित्सक ने बताया सोशल साइट्स फेसबुक, व्हाट्सप, इंस्टाग्राम आदि प्लेटफार्म पर युवा देर रात तक समय बिताते हैं। ऐसे में वह बीमारियों को दावत दे रहे हैं। दिन से लेकर देर रात तक उस पर समय बिताते हैं। ऐसे में नींद पूरी नहीं होती है और वह बीमारी का शिकार हो जाते हैं।

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केस एक

शहर के मोहल्ला नई बस्ती निवासी 24 वर्षीय युवक तीन दिन पहले मेडिकल कॉलेज में पहुंचा। जहां चिकित्सक को नींद नहीं आने की बात बताई। युवक ने बताया कि पहले वह मोबाइल का प्रयोग देर रात तक करता था। अब वह इस आदत को बदलना चाह रहा है, लेकिन बिना इसके नींद ही नहीं आती है।

केस दो

बागवाला थाना क्षेत्र निवासी 32 वर्षीय युवक नींद नहीं आने की शिकायत लेकर चिकित्सक के पास पहुंचा। उसने बताया पांच वर्ष से वह मोबाइल का प्रयोग अधिक करने लगा। किसी से बात भी नहीं करता था। मोबाइल में ही लगा रहता था। अब उसे छोड़ना चाहता है, लेकिन मोबाइल को छोड़ नहीं पा रहा है। रात को नींद नहीं आती है।

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