जवाहर बाग मामले में महिलाओं को एटा कारागार में बंद किया गया है
मथुरा के जवाहरबाग हिंसा में गिरफ्तार महिलाओं और उनके बच्चों के आने के बाद जेल प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इन्हें किशोर सदन में रखा गया है। इन बंदियों के पास पहनने के लिए कपडे़ तक नहीं है। इसके चलते जिला कारागार अधीक्षक ने सामाजिक संस्थाओं से बच्चों के लिए दूध, बिस्किट, पुराने कपड़े उपलब्ध कराने की अपील है।
जवाहर बाग हिंसा में गिरफ्तार 96 महिलाओं और छह साल से कम उम्र के 73 बच्चों बुधवार को एटा जेल में शिफ्ट किया गया था। 607 बंदियों की क्षमता वाली जेल में इस समय से 1100 बंदी बंद हैं। ऐसे में इन्हें किशोर सदन में शिफ्ट किया गया। पहले ही दिन इन महिला बंदियों व उनके बच्चों के लिए पानी और शौचालय की समस्या खड़ी हो गई। जिला कारागार अधीक्षक अनूप सिंह ने बताया कि उनके आग्रह पर पालिका ने पानी के दो टैंकर और मोबाइल शौचालय की व्यवस्था करा दी। कारागार अधीक्षक की माने तो सबसे बड़ी दिक्कत महिलाओं और उनके बच्चों को पहनने के लिए कपड़ों की है। उन्होंने कहा कि दवाइयां, बिस्किट और दूध की व्यवस्था हो सकती है, लेकिन बच्चों और महिलाओं के पहनने के लिए कपड़ों की सबसे बड़ी समस्या है।
जिला कारागार में महिला बंदी ने जन्मा बेटा
एटा। मथुरा के जवाहरबाग हिंसा में गिरफ्तार बरेली जिले कि दलतपुर केरना निवासी गर्भवती महिला धर्मवती पत्नी सीताराम को मथुरा जेल से एटा जिला कारागार शिफ्ट किया गया था। गुरुवार को महिला को दर्द होने पर पहले कारागार अस्पताल में भर्ती कराया, बाद में उसे महिला जिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए रेफर दिया गया, जहां धर्मवती ने गुरुवार शाम एक बेटे को जन्म दिया है। कारागार अधीक्षक अनूप सिंह के मुताबिक जच्चा-बच्चा दोनाें स्वस्थ हैं।