क्यों जरूरी है देहदान
एक मृत शरीर मेडिकल छात्रों के लिए पहला शिक्षक होता है। वर्चुअल सिम्युलेटर और थ्रीडी मॉडल के बावजूद मानव शरीर की जटिलताओं को समझने के लिए वास्तविक देह का कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए सर्जन जटिल ऑपरेशन की तकनीक सबसे पहले दान की गई देह पर ही सीखते हैं। कैंसर, अल्जाइमर और अन्य लाइलाज बीमारियों पर शोध के लिए मानव ऊतकों की आवश्यकता इससे ही पूरी होती है।
प्रमुख चुनौतियां
देश में देहदान के कम होने के पीछे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं। कई लोग मानते हैं कि पूर्ण शरीर के बिना अंतिम संस्कार करने से मोक्ष नहीं मिलता जबकि अधिकांश धर्म मानवता की सेवा को सर्वोपरि मानते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल 22-25 प्रतिशत आबादी ही देहदान की प्रक्रिया से वाकिफ है। अक्सर व्यक्ति संकल्प लेता है लेकिन मृत्यु के बाद भावनात्मक दबाव में परिवार के सदस्य देह सौंपने से हिचकिचाते हैं।
उम्मीद की किरण
चुनौतियां बड़ी हैं लेकिन बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। 2024 में देश में रिकॉर्ड 18,900 से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए हैं। तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्य देहदान और अंगदान में मॉडल बनकर उभरे हैं। केंद्र सरकार ने 2025 में जागरूकता बढ़ाने के लिए अंगदान जीवन संजीवनी अभियान शुरू किया है।
देहदान कैसे करें
इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी सरकारी मेडिकल कॉलेज या नेशनल ऑर्गन एंड टिस्सू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (नाटो) की वेबसाइट पर जाकर संकल्प पत्र भर सकता है। अपने इस फैसले की जानकारी परिवार को देना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
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