फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: दुनिया छोड़ राजमिस्त्री सिखा गए जीवन का मकसद...मेडिकल काॅलेज की टीम ले गई शव, बेटे ने भी पकड़ी पिता की राह

Sun, 28 Dec 2025 12:50 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

राजमिस्त्री बीमार थे। शनिवार को घर पर ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे जहां चिकित्सक ने उनको मृत घोषित कर दिया। इसके बाद अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज की टीम को सूचना दी गई।
विज्ञापन
मृतक का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एटा के मोहल्ला आंबेडकर नगर में शनिवार को 85 वर्षीय राजमिस्त्री भूपत सिंह का निधन हो गया। वह बीमार थे। सूचना जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ को दी गई। वहां से टीम आई और उनका शव ले गई। भूपत सिंह ने जीवित रहते ही 21 दिसंबर 2017 को देहदान के लिए मेडिकल कॉलेज में पंजीकरण कराया था। पिता की सोच से प्रभावित होकर छोटे बेटे केपी मौैर्य ने भी देहदान के लिए पंजीकरण करा लिया है।
विज्ञापन


केपी मौैर्य ने कहा कि पिता भूपत सिंह राजमिस्त्री होकर भी दूरदर्शी सोच रखते थे। कहते थे भगवान ने जो जीवन दिया है उसका सदुपयोग करें। जीवन के बाद शरीर को दान करने से मेडिकल छात्रों को लाभ मिलेगा। इसी सोच के साथ उन्होंने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में देहदान के लिए पंजीकरण कराया था। उन्होंने बताया, पिता भूपत सिंह बीमार थे, शनिवार को घर पर ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर पहुंचे जहां चिकित्सक ने उनको मृत घोषित कर दिया। इसके बाद अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज की टीम को सूचना दी गई।

जानकारी पाकर सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी मौके पर आ गए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार देहदान या अन्य अंग दान करने के इच्छुक लोगों को अभियान चलाकर जागरूक करना चाहिए ताकि लोगों के अंदर जागरूकता आ सके। भूपत सिंह के बड़े बेटे कृपाल सिंह ने बताया कि छोटे भाई केपी मौर्य ने भी पिता से प्रेरित होकर देहदान के लिए पंजीकरण करा लिया है।
विज्ञापन


 
विज्ञापन

क्यों जरूरी है देहदान
एक मृत शरीर मेडिकल छात्रों के लिए पहला शिक्षक होता है। वर्चुअल सिम्युलेटर और थ्रीडी मॉडल के बावजूद मानव शरीर की जटिलताओं को समझने के लिए वास्तविक देह का कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए सर्जन जटिल ऑपरेशन की तकनीक सबसे पहले दान की गई देह पर ही सीखते हैं। कैंसर, अल्जाइमर और अन्य लाइलाज बीमारियों पर शोध के लिए मानव ऊतकों की आवश्यकता इससे ही पूरी होती है।

प्रमुख चुनौतियां
देश में देहदान के कम होने के पीछे सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं। कई लोग मानते हैं कि पूर्ण शरीर के बिना अंतिम संस्कार करने से मोक्ष नहीं मिलता जबकि अधिकांश धर्म मानवता की सेवा को सर्वोपरि मानते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल 22-25 प्रतिशत आबादी ही देहदान की प्रक्रिया से वाकिफ है। अक्सर व्यक्ति संकल्प लेता है लेकिन मृत्यु के बाद भावनात्मक दबाव में परिवार के सदस्य देह सौंपने से हिचकिचाते हैं।

उम्मीद की किरण
चुनौतियां बड़ी हैं लेकिन बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। 2024 में देश में रिकॉर्ड 18,900 से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए हैं। तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्य देहदान और अंगदान में मॉडल बनकर उभरे हैं। केंद्र सरकार ने 2025 में जागरूकता बढ़ाने के लिए अंगदान जीवन संजीवनी अभियान शुरू किया है।

देहदान कैसे करें
इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी सरकारी मेडिकल कॉलेज या नेशनल ऑर्गन एंड टिस्सू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (नाटो) की वेबसाइट पर जाकर संकल्प पत्र भर सकता है। अपने इस फैसले की जानकारी परिवार को देना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

ये भी पढ़ें-UP Weather: हर तरफ घना कोहरा...सर्दी में गायब हुआ ताजमहल, तीन दिन और गिरेगा तापमान
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें