बुलंदशहर पुलिस लाइन में हुई गोलीबारी में मरने वाले मनोज यादव की पत्नी सुशीला यादव ने शुक्रवार रात फांसी लगाकर जान देने का प्रयास किया। तुरंत ही परिवारीजनों ने उसे फंदे से उतार लिया, जिसके चलते उनकी जान बच गई। बेहोशी की हालत में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मनोज यादव की मौत के बाद से सुशीला सुधबुध खो बैठी है और किसी को पहचान नहीं रही है। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते ही उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की।
बता दें, गत 22 अगस्त को बुलंदशहर पुलिस लाइन में एक सिपाही सौरभ त्यागी ने मनोज यादव की गोली मार कर हत्या कर दी थी और दो अन्य को गोली मारकर घायल कर दिया था। बाद में सौरभ ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। मनोज यादव एटा के गांव सुल्तानपुर के रहने वाले थे। सुल्तानपुर स्थित घर में शुक्रवार रात करीब एक बजे सुशीला ने फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की, उस समय परिवार जगा हुआ था और उसे बचा लिया।
मनोज के भाई जितेंद्र ने बताया कि सुशीला सुधबुध खो चुकी है और गहरे सदमे में है। परिवार के लोगों को पहचानना भी उसने बंद कर दिया है। घटना की सूचना पर शनिवार को सीओ सिटी निमेश कटियार जिला अस्पताल पहुंचे। खबर लिखे जाने तक सुशीला को होश नहीं आया था।
पुलिस जंाच पर उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग
परिवारीजनों ने लगाया आरोप, सौरभ को बरगलाकर कराई गई मनोज की हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
एटा। मनोज यादव की हत्या के मामले में परिवारीजनों को गहरी साजिश की बू आ रही है और उन्होंने बुलंदशहर पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
मनोज के भाई जितेेंद्र ने बताया कि छुट्टी नहीं मिलने के कारण डिप्रेशन में आकर सौरभ त्यागी के घटना करने और निशाना आरआई होने की बात बुलंदशहर पुलिस कह रही है। सौरभ त्यागी बीस अगस्त को आजमगढ़ से ट्रेनिंग कर पुलिस लाइन ड्यूटी पर लौटा था। घटना से कुछ देर पहले ही आरआई मनोज के पास बैठे थे और आरआई के उठते ही सौरभ ने मनोज पर गोलियां चला दीं। यदि निशाना आरआई थे तो उनपर गोली क्यों नहीं चलाई, उनके जाने के बाद क्यों घटना क ी। आरआई पर उनके कार्यालय या बंगले में घुसकर पर भी हमला कर सकता था। घटनास्थल के पास ही जीडी कार्यालय, गणना, क्वाटर गार्ड, एमटी और आरआई का दफ्तर है, लेकिन किसी कर्मचारी ने सौरभ को रोकने की कोशिश नहीं की। जितेंद्र मनोज के पास ही बुलंदशहर में रह कर स्टडी कर रहा था और घटना से कुछ मिनट पहले ही वो कोचिंग से पुलिस लाइन स्थित घर लौटा था।
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गंभीर हालात में बाइक से पहुंचाया था अस्पताल
घटना के बाद घायल मनोज को उसके साथी बाइक से लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया था। परिवारीजनों का आरोप है कि अफसरों ने तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मंगाई। उनमें इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि मनोज के अंतिम संस्कार में केवल एसडीएम और सीओ ही पहुंचे। पुलिस-प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी सांत्वना देने के लिए भी नहीं पहुंचा।
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मनोज यादव को शहीद का दर्जा देने की मांग
भाई नरेंद्र का कहना है कि मनोज की मौत ड्यूटी के दौरान हुई है। ऐसे में उसे शहीद का दर्जा दिया जाए। मनोज की पत्नी और बच्चों के रहने के लिए मकान, दो बेटों आर्यन और अभिषेक की पढ़ाई का खर्चा सरकार उठाए। साथ ही पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग भी उन्होंने मुख्यमंत्री से की है।