सकीट। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे जमीनी हकीकत के आगे दम तोड़ रहे हैं। कस्बे के सरकारी अस्पताल में दो साल पहले आई एक्सरे मशीन आज तक शुरू नहीं हो सकी है। टेक्नीशियन का पद खाली होने से ये मशीन बंद कमरे में धूल फांक रही है।
कस्बे के अस्पताल में अन्य खून की जांच, बलगम, पेशाब, शुगर आदि की जांच की सुविधा है, लेकिन एक्सरे न होने पर मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। लोगों की मांग पर दो वर्ष पहले एक्सरे मशीन अस्पताल भेजी गई। टेक्नीशियन की तैनाती न होने से पिछले दो वर्षों से यह मशीन शोपीस बनी हुई है। अस्पताल से एक्सरे के मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। रोजाना चार-पांच मरीज एक्सरे कराने के लिए बीस किमी की दूरी तय कर मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। वहां एटा शहर जाते हैं। अधिक भीड़-भाड़ होने पर मरीजों का पूरा दिन खराब होता है। केंद्र प्रभारी डॉ. शिवकुमार राजपूत ने बताया कि टेक्नीशियन की तैनाती के लिए कई बार सीएमओ से कहा गया है।
ससुर के साथ घर जाते समय हमारी बाइक की टक्कर हो गई। हादसे में हाथ में फ्रेक्चर होने पर एक्सरे कराने के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। वहां भीड़ अधिक होने पर निजी अस्पताल में एक्सरे कराना पड़ा।
चित्रा देवी शिक्षिका, डूंगरपुर
कपड़े उतारते समय बंदरों के हमला करने पर छत से नीचे गिरने पर पैर में फ्रेक्चर हो गया। टेक्ननीशियन के अभाव में कस्बे के अस्पताल में एक्सरे नहीं हो सका। अगले दिन मेडिकल कॉलेज जाकर एक्सरे कराना पड़ा।
अवधेश प्रजापति, मोहल्ला कायस्थान
एक्सरे- टेक्नीशियन का अभाव है। जिले में वर्तमान में केवल दो है। स्टाफ की नियुक्ति के लिए शासन को मांग भेजी गई है। नवीन तैनाती के साथ सकीट में मशीन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ एटा
सकीट सीएचसी पर बंद पड़ा एक्सरे कक्ष। संवाद
सकीट सीएचसी पर बंद पड़ा एक्सरे कक्ष। संवाद