एटा। सपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कामधेनु के तहत संचालित 75 इकाइयों में 59 बंद हो चुकी हैं। अब विभाग ने इकाइयों को दी जाने वाली ब्याज की धनराशि पर रोक लगा दी है। वहीं बैंक की ओर से वसूली की जा रही है।
सपा सरकार में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कामधेनु योजना का शुभारंभ किया गया था। इस दौरान दुधारु पशुओं की इकाई स्थापित करने के लिए बैंक से लोन भी दिलाया गया। इतना ही नहीं उस पर लगने वाले ब्याज का 12 फीसदी तक की भरपाई पशुपालन विभाग की ओर से होती है।
जिले में 100 पशुओं की पांच, 50 पशुओं की 30 और 25 पशुओं की 40 इकाइयां स्थापित हुईं। धीरे-धीरे इकाइयां घाटे में पहुंचे लगी। ऐसे में एक-एक कर उनको बंद किया जाता रहा। अब स्थिति यह है कि 100 पशुओं की इकाइयां जिले में बंद हो चुकी हैं, जबकि 50 पशु की महज एक इकाई और 25 पशुओं की 15 इकाई ही चल रही हैं।
100 पशुओं 121.52 लाख मिलते थे
योजना के तहत 100 पशुओं की इकाई की लागत 121.52 लाख रुपये थी। इसमें 91 लाख 14000 रुपये ऋण बांटा। वहीं 32.82 लाख रुपये ब्याज की प्रतिपूर्ति पशुपालन विभाग को करनी थी। मिनी कामधेनु में 50 पशुओं की इकाई की लागत 50.38 लाख रुपये में 37.94 लाख रुपये लोन बांटा गया और ब्याज 13.66 लाख रुपये था। माइक्रो कामधेनु 26.99 लाख रुपये से 25 पशुओं की इकाई स्थापित की गई। जिन पर 20.25 रुपये का लोन दिया गया। ब्याज के रूप में 7.24 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
इकाई की स्थिति
योजना-इकाई-स्वीकृत-संचालित
कामधेनु, 109, 5, 0
कामधेनु, 50, 30, 1
माइक्रो कामधेनु, 40, 15
जिन इकाइयों में पशु संख्या या अन्य शर्तों का पालन नहीं हुआ है, उनकी विभाग से मिलने वाली ब्याज की धनराशि रोकी जा चुकी है। लोन के संबंध में बैंक की ओर से अपने स्तर से कार्रवाई की जा रही है। -एसपी सिंह, सीवीओ