एटा। दो वर्ष से मेडिकल काॅलेज के प्रांगण में बनी पुरानी बिल्डिंग में होम्योपैथी अस्पताल संचालित हैं, लेकिन यह बिल्डिंग जर्जर हालत में है। बरसात के समय इसमें छतों से पानी टपकता है। इसके चलते यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जबकि होम्योपैथी विभाग के चिकित्सकों द्वारा लगातार उच्चाधिकारियों से स्थान की मांग की जा रही। लेकिन अस्पताल के लिए कमरे उपलब्ध नहीं कराए गए। जर्जर भवन में काम करने वाले चिकित्सक, कर्मचारी और आने वाले मरीज भी डरे सहमे रहते हैं।
जिला अस्पताल में होम्योपैथी विभाग के पास खुद का भवन था। जिला अस्पताल जब मेडिकल कॉलेज में उच्चीकृत हुआ तो होम्योपैथी विभाग की बिल्डिंग को ध्वस्त करा दिया गया। उच्चाधिकारियों के निर्देशन में होम्योपैथी के चिकित्सक नगला केबल में एक भवन में बैठने लगे। लेकिन वहां मरीज नहीं पहुंच रहे थे। चिकित्सकाें ने पहल की तो दो वर्ष पहले मेडिकल कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग में पर्चा काउंटर के पास अस्पताल संचालित करने के लिए विभाग को एक कमरा दिया गया। लेकिन यह कमरा जर्जर हालत में हैं। इस कमरे की छतों का प्लास्टर कभी कभी छूटकर गिरता हैं। इसके अलावा छत से पानी टपकने की शिकायत है। जबकि यहां प्रतिदिन 150 नए मरीज इलाज के लिए होम्योपैथी ओपीडी में पहुंचते हैं। पुराने मरीजों को जोड़ लिया जाए तो यह संख्या प्रतिदिन 200 से 225 तक पहुंच जाती है।
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अधिकारियों से लगा रहे गुहार
होम्योपैथी विभाग के कर्मी भवन के लिए उच्चाधिकारियों से लगातार दो वर्षो से गुहार लगाने के साथ कॉलेज प्रशासन तक का चक्कर लगा रहे हैं। तबादला होकर गए डीएम ने भवन दिलाने का अश्वासन भी दे दिया था, लेकिन अब तक विभाग को भवन नहीं मिला है।
लगातार दो वर्षों से भवन के लिए लगातार पत्र लिखा जा रहा है, लेकिन अभी तक भवन उपलब्ध नहीं कराया जा सका। जिस भवन में अस्पताल संचालित है। वह भवन काफी जर्जर हाल में हैं। - डॉ. रूपकिशोर, प्रभारी जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी