रेलवे रोड तिराहे पर लगी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबूराम वर्मा की प्रतिमा। संवाद
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एटा। आजादी की लड़ाई के योगदान में एटा भी पीछे नहीं रहा है। जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबूराम वर्मा से निकटता के चलते महात्मा गांधी असहयोग आंदोलन के बाद यहां आए थे। शहर में वर्तमान में सब्जी मंडी वाले स्थान पर सभा हुई। जिसमें लोगों ने हर आंदोलन में सहभागिता कर देश की आजादी का संकल्प लिया। साथ ही विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। बाबूराम वर्मा की पौत्रवधू डॉ. निरुपमा वर्मा व अन्य परिजनों के माध्यम से इसे विभिन्न पुस्तकों में उल्लिखित किया है।
डॉ. निरुपमा वर्मा बताती हैं कि बाबा स्वतंत्रता सेनानी बाबूराम वर्मा काफी कम उम्र से ही स्वतंत्रता आंदोलनों में हिस्सा बनने लगे। एटा में कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। कई बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सीधे संपर्क में आए। 1922 में असहयोग आंदोलन के बाद उनके बुलावे पर महात्मा गांधी एटा आए थे। वर्तमान में जिस जगह सब्जी मंडी है, वहां उनकी सभा हुई थी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। उनके आह्वान पर सभी लोगों ने हर तरह से आंदोलनों में सहयोग का संकल्प लिया। वहीं अंग्रेजी हुकूमत के विद्रोह के खिलाफ हुंकार भरी। इस दौरान कई लोगों ने अपने-अपने स्तर से आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। घंटाघर वाली जगह पर विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई थी। इसके बाद जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्रांतिकारियों का उत्साह और बढ़ गया। लोग देश की आजादी के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार थे। विभिन्न गतिविधियां लगातार होती रहीं।