एटा। शहर के मोहल्ला हाजीपुरा निवासी एक परिवार के चार लोग डायरिया की चपेट में आ गए। रविवार को उन्हें मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के लिए पूरी दवाएं भी नहीं मिलीं। बाहर से दवा मंगाकर उनका इलाज किया गया।
शहर के मोहल्ला हाजीपुरा निवासी रिषीपाल सिंह ने बताया कि शनिवार को सबसे पहले उनको डायरिया हुआ था। इसके बाद बेटी छह वर्षीय बेटी सैजल और चार वर्षीय बेटा शिवांक परेशान हुए। बाद में गर्भवती पत्नी लता भी डायरिया की चपेट में आ गई। पहले एक चिकित्सक से दवा ली, कोई आराम नहीं मिला।
इसके बाद एक अन्य चिकित्सक को दिखाया तो उसने बेटी को दवा की मात्रा अधिक दे दी। जिसकी वजह से बेटी बेहोश हो गई और हालत खराब हो गई। मेडिकल कॉलेज लेकर आए, खुद भी भर्ती हुए अब हालत में सुधार है। रिषीपाल ने यह भी कहा कि इमरजेंसी में कुछ दवाएं नहीं मिलीं। जिसके चलते इलाज होने में परेशानी आई तो मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदकर लानी पड़ीं। इसके बाद उपचार शुरू हो सका।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में टिटनेस के इंजेक्शन भी नहीं हैं। ये भी मरीजों को बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं। रविवार को इंजेक्शन लगवाने पहुंचे एक मरीजों को यहां ड्यूटी कर रहे डॉ. राहुल वार्ष्णेय ने इंजेक्शन न होने की बात कही। बताया कि इंजेक्शन काफी दिनों से नहीं है, मांग भेजी गई है।
मेडिकल कॉलेज में इस समय दवाओं की कमी है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। तीन-चार दिनों में दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी। कुछ मरीजों के इलाज में चिकित्सा कर्मी भी लापरवाही करते हैं, इसकी भी जांच कराई जा रही है।
डॉ. नवनीत सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज