एटा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत एक साल में 21 बच्चों को जटिल बीमारियों से मुक्ति दिलाई गई है। कटे हुए होठ, मुड़े पैर जैसी बीमारियों से ये बच्चे पीड़ित थे। अलीगढ़ तक इनका इलाज कराया गया। इन बच्चों की खोज घर-घर और स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों पर पड़ताल के बाद की गई।
जिले में प्रत्येक ब्लॉक पर दो आरबीएसके की टीमें कार्य कर रही हैं। एक टीम में दो चिकित्सक, ऑप्टोमैट्रिस्ट और एक स्टाफ नर्स को तैनात किया गया है। इनके द्वारा घर-घर और स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की गंभीर बीमारियों की पड़ताल करनी होती है। पिछले वित्तीय वर्ष की बात की जाए तो 36 बच्चों को चिह्नित किया गया। इनमें से 21 का उपचार कराया गया है। इनमें 11 (क्लब फुट) टेड़े पैर वाले बच्चे थे। जबकि नौ बच्चे ऐसे थे जिनके होंठ जन्म से ही कटे हुए थे। एक बच्चा बोलने और सुनने में अक्षम था। जबकि ब्लॉक मारहरा क्षेत्र के एक ऐसे बच्चे की भी पहचान की गई जिसके दिल में छेद था। परिजन को बच्चे की बीमारी के बारे में आभास तक नहीं था।
इस बच्चे की अलीगढ़ में उपचार प्रक्रिया चल रही है और उसका ऑपरेशन भी कराया जाएगा। बता दें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिह्नित गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों का उपचार सरकार की ओर से निशुल्क कराया जाता है। आरबीएसके नोडल अधिकारी डॉ. ओपी आर्या ने बताया कि पिछले वर्ष मार्च तक गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 36 बच्चों को चिह्नित किया गया था। इनमें से 21 का उपचार कराया जा चुका है। जबकि दिल में छेद की परेशानी झेल रहे बच्चे के उपचार की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
आरबीएसके योजना प्रबंधक अभिलाख सिंह ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षाधिकारी, सीडीपीओ और आरबीएसके टीमों की बैठक होती है। इसमें एक सप्ताह की कार्ययोजना तैयार की जाती है। तीनों विभागों के अधिकारी व कर्मचारी आपसी सामंजस्य बनाकर बच्चों के स्वास्थ्य पर कार्य कर रहे हैं।