एटा। तीन दिन से लगातार मौसम में बदलाव जारी है, बृहस्पतिवार की सुबह करीब 7 बजे जिले में कई जगहों पर हल्की बूंदा-बांदी हुई, इसकी वजह से सर्दी बढ़ने के साथ ही किसानों की भी धड़कने बढ़ गई। वर्तमान में सरसों की फसल पक चुकी है और ज्यादातर खेतों में कटी पड़ी है ऐसे में नुकसान की संभावनाएं बढ़ी हुई हैं। अगर तेज बारिश के साथ ही ओलावृष्टि हो जाती है तो किसान बर्बाद हो जाएगा। साथ ही आलू की फसल करने वाले किसान भी परेशान हैं।
जिले में बड़े स्तर पर सरसों की फसल की जाती है, करीब 60 हजार हेक्टेयर में किसानों ने सरसों की है। वर्तमान में सरसों, लाई खेतों पर पकी खड़ी है। सरसों की फसल करने वाले किसानों की धड़कने बादलों को देखकर बढ़ी हुई हैं। कई जगहों पर हल्की ओलावृष्टि भी दो दिन पहले हो चुकी है, इसकी वजह से भी बेचैनी बढ़ी हुई है। बृहस्पतिवार की सुबह भी हल्की बूंदा-बांदी हुई तो किसान परेशान हो उठे। मौसम विभाग की ओर से अगले कई दिन धूप निकलने के संकेत दिए हैं लेकिन किसान भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि कई बार मौसम विभाग के पूर्वानुमान झूठे साबित हुए हैं। वहीं आलू की फसल के किसानों को भी नुकसान की आशंकाएं सता रही हैं।
जिला कृषि अधिकारी डाॅ. मनवीर सिंह ने बताया कि जिले में 60 हजार हेक्टेयर रकवा में सरसों की फसल है। बारिश व ओलावृष्टि होने से किसानों को नुकसान हो सकता है, लेकिन पिछले दो दिन में हल्की ओलावृष्टि व बारिश हो चुकी है। अब तक विशेष नुकसान नहीं है। एक सप्ताह तक मौसम पूरी तरह से साफ है। इस बीच किसान सरसों की फसल की कटाई व कुटाई कर सकते हैं।
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सरसों की फसल काफी क्षेत्रफल में है। अगर बारिश और ओलावृष्टि होती है तो नुकसान होने की संभावनाएं हैं। -धर्म सिंह, छछैना
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किसानों को मौसम विभाग व कृषि अधिकारियों के संपर्क में रहना चाहिए। जागरुकता से नुकसान से बचा जा सकता है। -गुड्डू सिंह, छछैना