एटा। बाजारों में बिक रहा नकली और गुणवत्ताहीन बीज किसानों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। हाल ही में सरसों के बीज के दो नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। जबकि बुवाई के समय ये बीज बाजारों में खपकर खेतों में बो दिया गया। किसानों की चिंता यही है कि इससे पैदावार कैसी मिलेगी?
नकली बीज का खेल हर फसल की बुवाई के समय चलता है। रोकथाम और कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदार छापामार कर जांच के लिए कुछ सैंपल भी ले लेते हैं, लेकिन जब तक इनकी जांच होकर आ पाती है, बीज बाजारों से खत्म हो गया होता है और इसकी बुवाई कर दी गई होती है। इसका खामियाजा किसानों को ही उठाना पड़ता है। कहीं पौधे निकलने में ही समस्या होती है तो कहीं पैदावार में काफी गिरावट आ जाती है। इस स्थिति में किसानों की मेहनत और रुपये के अलावा एक फसल का सीजन बर्बाद हो जाता है।
6 नवंबर को कृषि विभाग ने सकीट में जनता बीज भंडार और मलावन में सुनहरी बीज भंडार से सरसों के बीज का एक-एक नमूना लिया था। जांच में ये फेल हो गए। इनकी रिपोर्ट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान सुशील कुमार, भूपेंद्र शर्मा, रोहित शाक्य ने बताया कि तमाम किसानों ने इस तरह के बीज से फसलें बोई हैं। यदि बीज की गुणवत्ता खराब है तो पैदावार पर असर पड़ेगा। जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने बताया कि नकली खाद-बीज की बिक्री रोकने के लिए लगातार छापामार कार्रवाई की जाती है, जो नमूने फेल पाए गए हैं, संबंधित दुकानदारों के लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही इनसे संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
नकली कीटनाशक से किसानों की जेब पर डाका
मिरहची। कस्बे से लेकर गांव तक तमाम दुकानों पर नकली कीटनाशक बेचे जा रहे हैं। नामी-गिरामी कंपनियों के नाम पर दुकानदार किसानों को नकली दवाएं थमाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। कंपनियां भी अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए बिक्री अधिकार पत्र खुले हाथों से बांट रही हैं। हाल यह है कि दवा की दुकानों के बाहर रेट लिस्ट तक नहीं लगी है। क्षेत्र के किसान भूप सिंह, प्रमोद कुमार, मुन्नालाल आदि ने बताया कि कितनी भी महंगी दवा लेकर आएं लेकिन फसल को कीटों से सुरक्षा नहीं मिल पाती है। संवाद