एटा। मेहनत के साथ दिमाग लगाया तो इलाके के खेतों में पैदा होने वाली मूंगफली ''सोना'' बन गई। अवागढ़ क्षेत्र के एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) ने मूंगफली को व्यापारियों, बिचौलियों को न बेचकर सरकार को बिक्री की तो किसानों की आय बढ़ गई। एफपीओ ने महज तीन साल में अपना टर्नओवर करीब तीन करोड़ रुपये पर पहुंचा दिया। संगठन से जुड़े 650 किसानों को इसका फायदा मिल रहा है।
अवागढ़ ब्लॉक क्षेत्र के गांव हादी दादपुर के रहने वाले निपेंद्र शर्मा ने बताया कि कृषि से स्नातक की शिक्षा प्राप्त कर खेती-किसानी के बारे में खासी जानकारी हासिल की। इसके बाद किसानों की आय बढ़ाने और दशा सुधारने का विचार मन में आया। मार्च 2022 में अवागढ़ ग्रामोद्योग फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया। शुरुआत कम किसानों से की। अब 650 किसान जुड़ गए हैं। कई तरह की उपज के साथ ही दूध का काम भी इसके जरिए किया जा रहा है। मुख्य कार्य मूंगफली का है।
निपेंद्र ने बताया कि जिले में मूंगफली की पैदावार काफी होती है। किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। व्यापारी, बिचौलिया सस्ती उपज खरीदकर विभिन्न कंपनियों को सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमाते हैं। ऐसे में अपने एफपीओ के जरिये किसानों की मूंगफली भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) को भेजना शुरू की। अच्छी गुणवत्ता की जो मूंगफली इस सीजन में मंडी में 5800 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही थी, नैफेड में इसे 6783 रुपये क्विंटल में खरीदा गया। इससे किसानों को काफी फायदा हुआ।
जल्द शुरू होगी प्रसंस्करण इकाई
निपेंद्र ने बताया कि वह जल्द ही प्रसंस्करण इकाई की भी स्थापना करने वाले हैं। इससे मूंगफली सहित अन्य अनाज की प्रोसेसिंग स्थानीय स्तर पर की जा सकेगी। ऐसे में किसानों की उपज का दाम बढ़ेगा और उनकी आय में भी इजाफा होगा।