एटा। कम राजस्व वसूली से विद्युत अधिकारी कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर संकट बढ़ गया है। तीन महीने बाद भी भुगतान नहीं हो रहा। ऐसे में हर माह जिले में साढ़े चार करोड़ रुपये का एरियर बढ़ रहा है।
विद्युत उपभोक्ताओं की उदासीनता विद्युत कर्मियों पर भारी पड़ रही है। जिले में तैनात पांच सौ से अधिक संविदा कर्मियों-पूर्व सैनिक आर्थिक संकट में हैं। कम राजस्व वसूली के चलते इन्हें तीन माह बाद भी वेतन-भत्ते नहंी मिल रहे। अधिकारियों का कहना है कि जिले से मिलने वाला आधा अधूरा राजस्व बिजली कंपनियों को भुगतान हो जाता है। जबकि जिले में हर माह साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक का एरियर बढ़ जाता है। इसके चलते लक्ष्य एवं थ्रो रेट भी नहीं बढ़ता।
जिले के एक लाख 84 हजार 400 विद्युत उपभोक्ताओं में शहरी खंड के 28046, ग्रामीण खंड प्रथम के 76917 एवं द्वितीय के 79437 विद्युत उपभोक्ता शामिल हैं। इन पर हर माह साढ़े चार करोड़ से अधिक का एरियर बढ़ जाता है।
अच्छी विद्युत व्यवस्थाओं के लिए बिजली चोरी रोकने के साथ राजस्व वसूली बढ़ाना होगा। कम वसूली के चलते विभागीय कर्मियों को वेतन, भत्ते नहीं मिल पा रहे। तीन माह बाद भी सैकड़ों संविदा कर्मी खाली हाथ हैं।
आरबी राय, सोपाली सिंह अधिशासी अभियंता