उत्तर प्रदेश के एटा में चिकित्सकों का कहना है कि युवाओं की बदलती जीवन शैली उन्हें बीमारियों का शिकार बना रही है। युवाओं के खानपान में बदलाव हुआ है। इसके साथ कई युवा धूम्रपान, शराब आदि का सेवन करते हैं। ऐसे में उनके फेफड़े कमजोर हो जाते हैं। टीबी का बैक्टीरिया ऐसे लोगों को आसानी से शिकार बना लेता है और लोग टीबी की चपेट में आ जाते हैं।
जिले में टीबी रोगियों की बात करें तो वर्तमान में 3033 रोगियों का उपचार चल रहा है। इसमें से 84 मरीजों को एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी है। यह टीबी खतरनाक होती है। इन मरीजों का उपचार नौ से 11 माह तक चलता है।
जिले में इस वर्ष 53 मरीज टीबी के ऐसे हैं, जिन्होंने बीच में ही दवा छोड़ दी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों से संपर्क किया गया, लेकिन वह टीबी की दवा खाने को तैयार ही नहीं है। वहीं जनवरी से अब तक जिले में 74 टीबी रोगियों की मौत भी हो चुकी है। जबकि वर्ष 2022 में 99 टीबी के रोगियों की मौत हुई थी।
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जिले में 3033 टीबी रोगियों का इलाज चल रहा है। मरीजों की लगातार निगरानी भी की जा रही है। युवा अधिक टीबी का शिकार हो रहे हैं। कहीं न कहीं बदलती जीवन शैली सहित तंबाकू के सेवन से यह रोग युवाओं में हो रहा है। -डॉ. राजेश शर्मा, डीटीओ