मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य को मरणोपरांत देहदान का फॉर्म देतीं दीप्ति चौहान ।संवाद
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एटा। शहर के मोहल्ला अरुणा नगर की रहने वाली दीप्ति चौहान ने देहदान की घोषणा कर नजीर पेश की है। एटा मेडिकल कॉलेज में जनहित व शोध के लिए देहदान का फॉर्म भरने वाली वह पहली व्यक्ति बन गईं हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी को मेडिकल कॉलेज पहुंच लेखन कार्य में रुचि रखने वाली दीप्ति चौहान ने देहदान का फॉर्म भरकर औपचारिकताएं पूरी कीं। बताया कि हमेशा से समाज और जनहित के लिए जोखिम लेने से पीछे नहीं हटी। 2009 में देहदान करने का संकल्प लिया था, लेकिन उस समय एटा में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
अब मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई तो संकल्प पूरा करने का अवसर मिला है। बताया कि मृत्यु के बाद शरीर को कोई नहीं ले जाता। यह मिट्टी में ही मिल जाना है। इससे अच्छा है कि देहदान के जरिए यह मेडिकल की पढ़ाई करने वाले बच्चों के कुछ काम आ सके। बताया कि इस फैसले को लेकर पुत्र भावुक हो गया और तैयार नहीं था। बाद में समझाने पर मान गया मेडिकल कॉलेज में मेरे साथ आया। देश के लिए 26 जनवरी से बड़ा और कोई दिन नहीं है, इसलिए इस अवसर को चुना।