एटा। राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की दुर्दशा जिले में इस चुनाव में भी रही। हालांकि प्रियंका वाड्रा के नेतृत्व में इस बार संगठन में जान फूंकने की पुरजोर कोशिश की गई। तमाम लुभावने वादों से मतदाताओं खासतौर से महिलाओं को आकर्षित किया गया, लेकिन ये कोशिशें मतदाताओं को अपने पक्ष में नहीं कर सकीं। जिले में पार्टी ने प्रत्याशियों के जरिये चुनाव में करीब 36 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन चारों सीट पर वोट महज चार हजार मिल सके। किसी भी प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बची।
2017 में पार्टी ने सपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन में कांग्रेस को जिले में एक भी सीट हासिल नहीं हुई। अन्य जिलों में भी स्थिति अच्छी नहीं रही। इस बार लड़की हूं लड़ सकती हूं, नारे के साथ इस बार पार्टी नई ऊर्जा के साथ चुनाव में जुटी थी। खासतौर से महिलाओं के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा था। एटा जिले में तीन महिला प्रत्याशियों को उतारकर पार्टी ने अलग तरह का पासा फेंका था। इन प्रत्याशियों पर पार्टी स्तर से पैसा भी खूब बहाया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रत्याशियों और संगठन ने चुनाव लड़ने में ढील डाल दी। यूं तो चारों प्रत्याशियों के चुनाव खर्च में 35.86 लाख रुपये का ब्योरा दिया गया है, लेकिन इतना खर्चा कहीं जमीनी स्तर पर नजर नहीं आया। जिसके चलते पार्टी वोटों को तरस गई। जलेसर और मारहरा सीट पर तो चार अंक का आंकड़ा भी नहीं छू सकी।
सबसे ज्यादा खर्च, सबसे कम वोट
चुनाव आयोग को दिए गए खर्च ब्योरे के मुताबिक कांग्रेस ने चुनाव में सबसे ज्यादा खर्च मारहरा विस क्षेत्र में किया। रिकॉर्ड के अनुसार 13.77 लाख रुपये यहां की प्रत्याशी तारा राजपूत ने खर्च कर दिए। जबकि इसी सीट पर पार्टी को सबसे कम 839 वोट मिले हैं।
प्रत्याशियों की स्थिति
प्रत्याशी चुनाव खर्च प्राप्त मत
एटा - गुंजन मिश्रा 2.34 1478
अलीगंज- सुभाष चंद्र 7.71 1026
मारहरा-तारा राजपूत 13.77 839
जलेसर-नीलमा राजपूत 12.02 858