एटा। ईरान-इस्राइल और अमेरिका के युद्ध और खाड़ी देशों में तनाव के कारण एटा का चिकोरी कारोबार बेहद प्रभावित है। पिछले 10 दिनों से कमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति नहीं होने से दो यूनिटों में काम बंद हो गया है। अन्य यूनिटों में लकड़ी से वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं। अब तक कारोबार को करीब 20 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उत्पादों के निर्यात में बेहद परेशानी आ रही है।
लाल समुद्र में जहाजों के आवागमन कम होने से यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों में चिकोरी उत्पादों के भेजने का किराया डेढ़ गुना बढ़ गया है। अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर संयुक्त हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया के देशों में घमासान का असर भारत के कारोबार पर भी पड़ा है। इस जंग ने एटा के निर्यातकों की नींद उड़ा दी है।
चिकोरी एटा जनपद का प्रमुख उद्योग है। यहां तीन बड़ी एक्सपोर्ट यूनिटें हैं। यहां से चकोरी प्रसोसिंग के बाद देश ही नहीं विदेशों में भेजी जाती है। चिकोरी से रोस्टेड क्यूब, ड्राइड क्यूब, चिकोरी पाउडर, लिक्विड आदि उत्पाद बनाकर हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले समेत कई कंपनियों को सप्लाई होते हैं। इनकी आपूर्ति अमेरिका, रूस, यूरोप, साउथ अफ्रीका समेत करीब 17 देशों में है।
चिकोरी से काॅफी के लिए बिलेंड भी बनाई जाती है। युद्ध का सीधा असर यहां के चिकोरी कारोबार पर पड़ा है।
स्थानीय निर्यातक प्रसून वार्ष्णेय ने बताया कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बाद टैरिफ की दरें घटने से कुछ हालात सामान्य हुए। अब इस युद्ध ने टेंशन बढ़ा दी है। ईरान ने रेड सी (लाल समुद्र) में जहाजों का आवागमन रोक दिया है। इससे शिपिंग कंपनियों ने भी किराया 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। ऑर्डर युद्ध से पहले लिया गया था। ऐसे में माल की पूर्ति में बड़ी समस्या आ रही है। माल जिस रेट में देना तय हुआ है वह पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है।