गांव जिरसमी निवासी चंद्रकेतु ने बताया कि बड़े भाई यतेंद्र सिंह (38) पर शहर के कई लोगों का कर्ज था। साहूकार उनको परेशान करते थे और भुगतान न करने पर गाली-गलौज करते हुए धमकी देते थे। इस बात से परेशान होकर यतेंद्र ने मंगलवार की रात अंगोछे का फंदा बनाया और लटक गए। जानकारी होते ही फंदे से उतारकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लाए। यहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। पत्नी व बच्चों सहित सभी परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
चंद्रकेतु ने बताया कि यतेंद्र अपनी कार को टैक्सी के रूप में चलाते थे। कोरोना काल में काम-धंधा बंद हो गया था। वहीं, यतेंद्र को मोबाइल गेम की लत लग गई थी। इसमें उन्होंने अपनी लगभग 80 लाख रुपये की प्रापर्टी बर्बाद कर दी। कई बार मना किया लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थे। इसके कारण कुछ दिन बाद उसके ऊपर शहर के लोगों का लगभग 30 लाख रुपये कर्जा हो गया। कर्जा निपटाने में काफी समस्या आ रही थी। साहूकार आए दिन घर पर आकर रुपये मांगते थे। परेशान होकर यतेंद्र ने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
महीने पर कमाई 15 हजार, कर्ज की देनदारी 1.30 लाख
चंद्रकेतु ने बताया कि यतेंद्र ने आरओ और आटा चक्की का काम कर लिया था। इसमें महीने पर करीब 15 हजार रुपये की कमाई होती थी। इससे घर का खर्च चलाना मुश्किल था। वहीं, कर्ज निपटाने के लिए हर महीने 1.30 लाख रुपये साहूकारों को अदा करने थे, जिसमें वह पूरी तरह असमर्थ हो गए थे।
सीओ सिटी अमित कुमार राय ने बताया कि परिजन के मुताबिक युवक ने फंदा लगाकर जान दी है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट आने पर मौत का कारण स्पष्ट हो जाएगा। कोई तहरीर मिलती है तो रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई भी की जाएगी।
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