एटा। स्थायी लोक अदालत में जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों को दायर कर त्वरित न्याय पा सकते हैं। इस अदालत की खास बात है कि दो माह में मामले का निपटारा होने की संभावना होती है। अब भवन और भू संपदा सहित तमाम मामलों के वादों की सुनवाई का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
स्थायी लोक अदालत बोर्ड अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि एक अगस्त 2017 में अदालत का गठन किया गया था। इसके बाद कोविड काल में अदालत प्रभावित हुई थी लेकिन अब फिर से संचालित कर दी गई है। अब अदालत का दायरा बढ़ा दिया गया है। जल, थल, हवाई यात्राओं, माल वाहन मामलों, टेलीफोन, पोस्टल सेवाओं, विद्युत, प्रकाश, जलापूर्ति, अस्पताल, औषधालय, बीमा, शिक्षा, शैक्षिक संस्थानों, भवन, भू संपदा, रीयल स्टेट आदि मामलों के वाद भी दायर किए जा सकते हैं। ऐसे मामलों को अदालत में आपसी सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत में सिविल अथवा आपराधिक विवादों के मुकदमों को भी दायर किया जा सकता है लेकिन शर्त है कि पहले से किसी वाद को न्यायालय अथवा फोरम में नहीं ले जाया गया हो। बताया कि अदालत में वाद दायर करने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है और दो माह में निस्तारित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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बीमा कंपनी से दिलाए 1.46 लाख
स्थायी लोक अदालत बोर्ड के न्यायिक सदस्य सतीश चंद्रा ने बताया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बस का परमिट नहीं होने पर क्लेम नहीं दिया जा रहा था। इस मामले की सुनवाई के लिए बस स्वामी राजेश कुमार ने वाद दायर किया। इस मामले में बस परिवहन निगम में अनुबंधित थी, जब निगम से अनुबंध है तो परमिट की आवश्यकता नहीं है। इसको लेकर आदेश पारित किया गया और 1 लाख 46 हजार 424 रुपये अदा करने के आदेश जारी किए गए हैं। बताया कि न्यायिक सदस्य नवनीत पचौरी भी बोर्ड में शामिल हैं और मामलों को निस्तारित किया जा रहा है।