एटा। आम आदमी को विपरीत परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता होती है। लेकिन लॉकडाउन की वजह से रक्तदान शिविर न लगने से जिले में ब्लड बैंक की स्थिति सही नहीं है। 18 लाख की आबादी 27 यूनिट रक्त के सहारे है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ऐसे संकट के समय मात्र 27 यूनिट रक्त ही बचा है। जबकि सामान्य दिनों में इसकी क्षमता 70 से 100 यूनिट तक रक्त रहती है। जनपद की आबादी लगभग 18 लाख है। साथ ही कासगंज, मैनपुरी, हाथरस की सीमा भी जिले से लगती है। वर्तमान में यहां छह कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज चल रहा है। जबकि तीन मरीज ठीक हो गए हैं। एक संक्रमित की मौत भी हो चुकी है।
जिले से अब तक 547 से ज्यादा सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जिस तरह कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। उसे देखते हुए ब्लड बैंक में कम से कम 100 यूनिट रक्त की आवश्यकता है। दूसरी ओर ब्लड बैंक में ‘ए’ व ‘ओ’ निगेटिव खून का अभाव है जबकि ‘एबी’ निगेटिव का एक यूनिट ही शेष बचा है। रक्त की कमी के चलते थैलीसीमिया, एनेमिक और गर्भवती महिलाओं सहित लावारिस के इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
1998 में बना था ब्लड बैंक
जिला अस्पताल में वर्ष 1998 में ब्लड बैंक की स्थापना की गई थी। उस दौरान ब्लड बैंक जिला अस्पताल के भवन में स्थापित किया गया, जिसे दस साल बाद यानी वर्ष 2008 में नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। 250 यूनिट की क्षमता वाली ब्लड बैंक अब तक जिला ही नहीं बल्कि पड़ोसी जिलों से आने वाले मरीजों के लिए भी वरदान साबित होती रही है।
एक मरीज को प्रतिमाह दिया जाता खून
जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में एक एनीमिया का मरीज पंजीकृत है। जहां प्रतिमाह इसे ब्लड बैंक से खून दिया जाता है। अगर यही स्थिति रही तो मरीज को आने वाले दिनों में दिक्कत हो सकती है।
ब्लड बैंक की स्थिति
ए पॉजिटिव - 7 यूनिट
बी पॉजिटिव - 3 यूनिट
बी निगेटिव - 2 यूनिट
एबी पॉजिटिव - 2 यूनिट
एबी निगेटिव - 1 यूनिट
ओ पॉजिटिब - 12 यूनिट
एबी निगेटिव - 0
ओ निगेटिव - 0
प्रचार से परहेज
रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की दिशा में प्रचार-प्रसार करने में विभाग का परहेज स्पष्ट रूप से दिखता है। हालत यह है कि रक्तदान दिवस जैसे महत्वपूर्ण मौके पर भी अनदेखी की जाती है।
सीएमओ की अपील
कोरोना संक्रमण के दौर में ब्लड बैंक में रक्त की कमी है। स्वयंसेवी संगठन के सदस्य और युवा स्वेच्छा से रक्तदान करें, ताकि मरीजों को जरूरत पड़ने पर आसानी से रक्त मुहैया कराया जा सके। - डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ।
नहीं मिलेगा तो रेफर करना पड़ेगा
‘ए’ व ‘ओ’ निगेटिव खून ब्लड बैंक में नहीं है। अगर किसी मरीज को निगेटिव खून की जरूरत पड़ती है। तो उसके साथ वालों का ग्रुप चेक कर डोनेट करा दिया जाता है। अगर साथ वाले किसी व्यक्ति का ग्रुप नहीं मिलता है। तो ऐसी हालत में मरीज को आगरा या अलीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। - डॉ. मधुप कौशल, ब्लड बैक प्रभारी।
स्वस्थ लोग करें रक्तदान
18 से 55 वर्ष तक का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं होती है। तीन माह के अंतराल पर पुन: रक्तदान किया जा सकता है। - सचिन पाठक, लैब टेक्नीशियन।