उत्तर प्रदेश के एटा में डीएपी खाद की काला बाजारी जमकर की जा रही है। शिकायतों को लेकर डीएम कृषि विभाग को इस पर अंकुश लगाने का आदेश दे चुके हैं। इसके बावजूद कोई असर नजर नहीं आ रहा है। ये दुकानदार किसानों से अवैध वसूली कर खाद की बोरी दुकान के पीछे से बेच रहे हैं।
मिरहची कस्बा से लेकर ग्रामीण अंचल तक डीएपी की बिक्री कर रहे दुकानदार खुलेआम एक बोरी 1500 से लेकर 1600 तक की बेच रहे हैं। जबकि सरकार द्वारा खाद का निर्धारित मुल्य 1360 रुपये है। बढौली निवासी किसान हेम सिंह का कहना है कि इस समय मटर और गेहूं की फसलों में खाद लगाने का काम चल रहा है।
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कस्बा में दुकानदार खाद न होने की कहकर किसानों से अवैध वसूली कर रहे हैं। मंहगे दामों पर खाद लेने वाले लोगों को दुकानदार पीछे के दरवाजे से बोरी निकाल कर दे रहे हैं। फालर निवासी किसान विपन कुमार, बबलेश कुमार, भूप सिंह, पप्पू, राम सिंह आदि किसानों ने बताया कि अवैध बिक्री करने वाले दुकानदारों को विभाग रोक नहीं पा रहा है।
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बताया कि इस कारण वह खुलेआम किसानों से खाद के नाम पर अधिक वसूली कर रहे हैं। इसे लेकर क्षेत्र का किसान परेशान है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने बताया कि खाद की कालाबाजारी का मामला संज्ञान मे नहीं है। यदि कहीं ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।