एटा। अक्षय तृतीया के वैवाहिक मुहूर्त पर बुधवार को जिले भर में करीब 250 शादियों की धूम रहेगी। एक दिन पहले सराफा बाजार में काफी चहल-पहल रही। इसके अलावा वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और अन्य सामानों की भी जमकर खरीदारी की गई।
अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है। जबकि बड़ा शादी सहालग भी होता है। इसके कारण शहर के प्रमुख बाजार बाबूगंज, हाथी गेट, घंटाघर आदि में मंगलवार को भी लोग सोना-चांदी खरीदने के लिए पहुंचे। दोपहर के बाद शाम को मौसम में ठंडक होते ही ग्राहकों की भीड़ और बढ़ गई। इसके अलावा कार, दोपहिया वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़ों की भी खरीदारी की गई। इसके साथ ही लोगों ने शुभ मुहूर्त में भवन निर्माण की नींव रखने, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों की भी तैयारी की है।
ज्योतिषाचार्य पं. गिरजेश पचौरी ने बताया कि अक्षय तृतीया पर शुभ वैवाहिक मुहूर्त है। साथ ही अन्य शुभ कार्यों के लिए भी मंगल योग हैं। जिले भर में 250 से अधिक शादियां होने का अनुमान है। घंटाघर स्थित सराफा कारोबारी गोपाल वर्मा ने बताया कि बुधवार को बड़ा सहालग है। इस बार अच्छा व्यापार होने की उम्मीद है। सोने के दाम में बढ़ोतरी हुई है लेकिन खरीदारी पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ रहा है। लोग वजन में कमी कराकर आभूषण खरीद रहे हैं।
विवाह स्थलों की बुकिंग फुल
अक्षय तृतीया के दिन शहर में विवाह स्थलों की बुकिंग काफी पहले ही फुल हो चुकी थी। 250 से अधिक शादियाें के लिए इनमें मंगलवार को दिन भर तैयारियां चलीं। शहर के रेलवे रोड स्थित एक विवाह स्थल स्वामी ने बताया कि उनके यहां मंगलवार के बाद बुधवार की भी बुकिंग काफी पहले ही हो गई थी। इसके बाद तमाम लोगों को मना करना पड़ा।
दुकानों पर चांदी के गोले और सुपाड़ी की रही मांग
सराफा दुकानों पर शादी की रस्माें के दौरान प्रयोग किए जाने वाले चांदी के गोले व सुपाड़ी की मांग खूब रही। दुकानदार मुकेश वर्मा ने बताया कि इस बार सोने के दाम प्रति 10 ग्राम एक लाख के करीब हैं। वहीं, चांदी 1 लाख रुपये प्रति किलो के करीब है। हालांकि, शादी वाले घरों में खरीदारी में कोई कमी नहीं है।
राजस्थानी लहंगों की खूब हुई ब्रिकी
सहालग को देखते हुए बाजारों में महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली। मंगलवार को महिलाएं व युवतियां कपड़े खरीदने पहुंचीं। राजस्थानी लहंगों की मांग सर्वाधिक रही। दुकानदार सुरेश ने बताया कि जोधपुरी लहंगा 20 से 25 हजार, रजवाड़ी 10 से 15 हजार, जयपुरी लहंगा 20 से 25 हजार बाजार में छाया हुआ है।