टीईटी के विरोध में कलेक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन करते शिक्षक। स्रोत स्वयं
एटा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर पहुंचकर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) की अनिवार्यता का विरोध कर धरना प्रदर्शन किया। पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन संगम लाल को सौंपा गया। ज्ञापन देते हुए बताया कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के सेवा-अधिकारों की रक्षा की मांग की। पदाधिकारियों ने कि वर्ष 2010 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में लागू किया गया था। उस समय प्रभावी नियमों और निर्धारित योग्यताओं के आधार पर की गई नियुक्तियों पर बाद में लागू मानकों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता और शिक्षा व्यवस्था में योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके सेवा-अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य लाभों का पूर्ण संरक्षण किया जाना चाहिए। वहीं शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
संगठन ने केंद्र सरकार से आवश्यक विधायी, नीतिगत अथवा प्रशासनिक हस्तक्षेप कर इस वर्ग को राहत देने की मांग की है। साथ ही सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस दूर करने का आग्रह किया गया है।