एटा। आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को तीन चरणों में निजी स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन मांगे जाते हैं। पहले चरण में 272 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 143 बच्चों को 38 विद्यालयों में प्रवेश लेना था, लेकिन सिर्फ 84 बच्चों ने स्कूलों में प्रवेश लिया है। जबकि दूसरे चरण के लिए 371 आवेदन आए हैं।
गरीब बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए सरकार द्वारा उन्हें शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाता है। जहां बच्चे की फीस से लेकर यूनिफार्म व किताबों का खर्चा तक सरकार द्वारा अदा किया जाता है। जिले में पहले चरण की प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है। जहां अभी तक 84 बच्चों ने प्रवेश लिया है। जबकि 59 बच्चों के माता पिता कॉल करने के बाद बीएसए ऑफिस नहीं पहुंचे हैं।
जबकि दूसरे चरण के तहत 371 आवेदन आए हैं। जहां एबीएसए स्तर से फार्मों का सत्यापन कर लिया गया है। सोमवार को चयनित बच्चों की सूची जारी कर दी जाएगी। जहां 28 अप्रैल तक सभी के स्कूलों में प्रवेश होने हैं।
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25 प्रतिशत सीटों का है प्रावधान
आरटीई के माध्यम से स्कूलों में बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान है। गरीब नागरिकों के बच्चों को निशुल्क एडमिशन की सुविधा सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
प्रथम चरण में चयनित बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। दूसरे चरण में आवेदन मांगे गए थे। उनका सत्यापन लगभग पूर्ण हो गया है। उसमें चयनित होने वाले बच्चों को 28 अप्रैल तक स्कूलों में प्रवेश लेना अनिवार्य है। - संजय सिंह, बीएसए