एटा। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में एक दुर्लभ मामला सामने आया है। यहां न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस बीमारी से पीड़ित एक 8 वर्षीय बच्ची का उपचार किया गया।
यह एक दुर्लभ दिमागी संक्रमण है, जो टीनिया सोलियम नामक फीता कृमि (टेपवर्म) के लार्वा या अंडों के कारण होता है। यह कीड़ा इससे मस्तिष्क में गाठें (सिस्ट) बना देता है, जिससे दौरे पड़ना (मिर्गी) प्रमुख लक्षण है। छह दिन उपचार के बाद बच्चे आगरा रेफर कर दिया गया है।
मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में पवांस की रहने वाली 8 वर्षीय बच्ची को परिजन ने 9 मई को भर्ती किया। बच्ची को मिर्गी व दौरे की शिकायत थी। यहां चिकित्सकों ने लक्षण के आधार पर जांच कराई। उसका सीटी स्कैन कराया गया। जांच में पता चला कि उसके दिमाग में न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस संक्रमण है। इसके बाद चिकित्सकों ने उसकी केस हिस्ट्री खंगाली। परिजन ने बताया कि वह कभी-कभी चाउमीन खाती थी। चाउमीन के साथ डाली जाने वाली कच्ची कच्ची बंदगोभी से संक्रमण फैलने की आशंका है। करीब 6 दिन उपचार देने के बाद भी उसे आराम नहीं मिला। शुक्रवार को चिकित्सक ने उसे आगरा के लिए रेफर कर दिया।