अब वह दिन दूर नहीं जब महानगर के बिजलीघरों का संचालन एक कंट्रोल रूम से होगा। इस बिजलीघरों में न तो स्विच यार्ड होगा और न ही एसएसओ की तैनाती। सभी बिजलीघर लाल डिग्गी स्थिति सेंट्रल कंट्रोल रूम से संचालित होंगे। ऐसा संभव सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजेशन (स्काडा) सिस्टम से होगा। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम अलीगढ़, फिरोजाबाद और झांसी का चयन स्काडा सिस्टम के तहत किया गया है।
सिस्टम ऐसे करेगा काम
इस सिस्टम के लागू होने से कंट्रोम रूम में बैठे ऑपरेटर के हाथ में सब कुछ रहेगा। कंट्रोल रूम के ऑपरेटर देख सकेंगे कि किस बिजलीघर या फीडर पर कितना बिजली लोड है। 33 केवी बिजलीघर या 11 केवी फीडर की लाइन में फॉल्ट होने पर कंट्रोल रूम में तत्काल अलार्म बजेगा।
कंट्रोम रूम से उस बिजलीघर या लाइन की बिजली काट दी जाएगी। इसके अलावा बिजली कटौती का जो आदेश आएगा, उस आदेश के अनुसार जितनी बिजली कटौती करनी है, वह भी कंट्रोल रूम से ही की जाएगी। सभी बिजलीघर ऑटो ब्रेकर और रिमोट सिस्टम से संचालित होंगे, जिनका सीधा संबंध कंट्रोल रूम से रहेगा।
चार कंपनियों ने लखनऊ में किया डिमोस्ट्रेशन
डिमोस्ट्रेशन में भाग लेकर लखनऊ से लौटे अलीगढ़ जोन के मुख्य अभियंता वीके मित्तल ने बताया कि जिन चार कंपनियों ने डिमोस्ट्रेशन किया है उनमें जीई, एलस्थोम, एक चाइनीज व एक अन्य कंपनी है। पॉवर कारपोरेशन को अप्रैल तक कंपनियों के संबंध में निर्णय करना है। जिम्मेदारी निर्धारित होने के बाद कंपनियां अपना प्रस्ताव देंगी कि पूरे सिस्टम पर कितनी लागत आएगी। इस सिस्टम के लागू होने से कर्मचारियों के संकट से मुक्ति मिलेगी वहीं बिजली आपूर्ति व्यवस्था बेहतर होगी।
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लाल डिग्गी में सेंट्रल कंट्रोल रूम
स्काडा सिस्टम को लागू करने के लिए लाल डिग्गी हाइड्रिल परिसर में सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाने का प्रस्ताव है। कंट्रोल रूम की बिल्डिंग बनाने के लिए जमीन भी पर्याप्त है। कंट्रोल रूम में पूरा सिस्टम व स्क्रीन आदि लगेगी।
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एक फीडर में फॉल्ट तो दूसरे से बिजली
ऑटोमाइजेशन सिस्टम के लागू होने से एक दूसरी व्यवस्था रिंगमैन फीडर की भी रहेगी। रिंगमैन फीडर बनने से यदि किसी फीडर में फॉल्ट आता है तो उस क्षेत्र की बिजली बंद कर, बाकी फीडर को दूसरे फीडर से जोड़कर त्वरित बिजली आपूर्ति की जा सकेगी।