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जानिए अखिलेश मंत्रिमंडल विस्तार के 8 खास पहलू

Fri, 19 Jul 2013 03:30 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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1. पूर्वांचल पर जोर :
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अपने मंत्रिमंडल के तीसरे विस्तार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पूर्वांचल पर ही फोकस किया है। गुरुवार शपथ लेने वाले चार मंत्रियों में से तीन पूर्वांचल का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके जरिये सपा ने आगामी चुनाव के मद्देनजर संतुलन स्थापित करके सियासी संदेश देने की कोशिश की है।

2. बेनी की काट :
राममूर्ति वर्मा को राज्यमंत्री से सीधे कैबिनेट मंत्री बनाकर सपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि चुनाव मैदान में वह बेनी से दो-दो हाथ करने को पूरी तरह से तैयार है। सपा की रणनीति राममूर्ति को बेनी के मुकाबले खड़ा करके कुर्मी वोट बैंक में सेंध लगाने तथा कुर्मियों के बीच बेनी का असर कम करने की भी है।
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3. अति पिछड़ों पर निगाह :
फेरबदल में जिस तरह से रामूमूर्ति वर्मा और गायत्री प्रजापति का ओहदा बढ़ाया गया है उससे यह साफ है कि अति पिछड़ों को लामबंद करने में सपा अपनी तरफ से कोई कसर बाकी रखना नहीं चाहती। वर्मा और प्रजापति के प्रमोशन को अति पिछड़ों को पार्टी के पाले में लाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

4. एक और विस्तार संभव :
अपनी कैबिनेट में दो और मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश छोड़ते हुए अखिलेश ने लोकसभा चुनाव से पहले एक और फेरबदल की चर्चाओं को हवा दे दी है। कहा जा रहा है कि जल्द ही एक और विस्तार हो सकता है जिसमें कुछ नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों के पर करतने के एजेंडे अमल किए जाने की संभावना है।

5. यूथ एजेंडा अभी बाकी :
तीसरे विस्तार में भी अखिलेश की अपने यूथ एजेंडे को आगे बढ़ाने की हसरत पूरी नहीं हुई है। चर्चा थी कि इस बार अखिलेश को अपने मनमाफिक कुछ नए युवा विधायकों को टीम में शामिल करने तथा भरोसेमंद राज्यमंत्रियों में से कुछ को प्रमोशन देने का मौका मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। संभव है कि लोकसभा चुनाव में उतरने से पहले वह एक और विस्तार के जरिये यूथ एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करें।

6. बुंदेलखंड को फिर निराशा :
मंत्रिमंडल के तीसरे विस्तार में भी बुंदेलखंड को निराशा हाथ लगी है। इस बार भी बुंदेलखंड से किसी को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। महिलाओं को सरकार में भागीदारी देने में भी अखिलेश ने तंगदिली दिखाई है।

7. यह हो गया अब जातीय आंकड़ा
अब यह बन गई तस्वीर : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को छोड़कर मंत्रिमंडल में अब 10 मुस्लिम, 10 ठाकुर, 09 यादव, 07 दलित, 05 ब्राह्मण, 04 कुर्मी, 02 वैश्य, 02 लोधी, 01 भूमिहार, 01 चौरसिया, 01 निषाद, 01 गूजर, 01 प्रजापति (कुम्हार), 01 पाल (गड़रिया), 01 लोध व 01 शाक्य (मौर्य/कुशवाहा) चेहरे हो गए हैं। अब मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य व भूमिहार को मिलाकर 18 अगड़े, 10 मुस्लिम, 07 दलित व 22 पिछड़े चेहरे हो गए हैं।
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8. पिछड़ों में भी संतुलन की सावधानी :
सिर्फ अगड़े, पिछड़े व अल्पसंख्यकों में ही नहीं बल्कि पिछड़ों के बीच भी संतुलन साधने की सावधानी बरती गई है। अब मुख्यमंत्री को मिलाकर 10 यादव हो गए हैं तो 04 कुर्मी, 01 जाट व 01 गूजर शामिल हैं। इसके अलावा 07 अति पिछड़ी जातियों के हैं। इसके जरिये सपा ने पिछड़ों के बीच भी बराबरी का बंटवारा का संदेश देने की कोशिश की है और यह साबित करने का प्रयास कि वह सभी को पर्याप्त तवज्जो देना चाहती है।
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