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चार्जशीट की खामियों ने दुर्गा को दी 'शक्ति'

Fri, 09 Aug 2013 08:23 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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निलंबित आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल को उत्तर प्रदेश सरकार ने चार्जशीट तो दे दी। लेकिन चार्जशीट की खामियां ही अब दुर्गा की शक्ति बनेगी।
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क्योंकि सरकार ने चार्जशीट में ना ही किसी जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया है और ना कोई ऐसा प्रमाण दिया है कि किन तथ्यों के आधार पर उन्हें निलंबित किया है। लिहाजा ऐसा कर सरकार ने नागपाल की मुश्किल राह को आसान कर दिया है।

अपने जवाब में नागपाल सरकार से तथ्यों और जांच रिपोर्ट के बारे में भी पूछ सकती हैं। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि अगले हफ्ते नागपाल अपना जवाब सरकार को सौंप सकती है।
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गुरुवार को उम्मीद की जा रही थी कि नागपाल सरकार को अपना जवाब प्रस्तुत करेंगी। क्योंकि अगले तीन दिन लगातार सरकारी अवकाश हैं। रविवार को प्रदेश सरकार ने नागपाल को चार्जशीट दी थी।

चार्जशीट में लगाए गए आरोपों के तथ्य क्या हैं या फिर निलंबित करने से पहले सरकार ने क्या कोई जांच की, इस बारे में इसमें कुछ नहीं बताया गया। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकार के पास कोई तथ्य या जांच रिपोर्ट है, जिस आधार पर उन्हें निलंबित किया गया?

एक वरिष्ठ आईएएस अफसर के मुताबिक चार्जशीट में लगाए गए आरोपों के तथ्यों को बताना जरूरी होता। अगर ऐसा नहीं है तो निलंबित अफसर जांच और तथ्यों के बारे में सरकार से पूछ सकता है।

सरकार अगर कोई तथ्य या जांच का हवाला नहीं दे रही है तो, वह नागपाल का ही पक्ष मजबूत कर रही है। हां, इतना जरूर है कि सरकार जवाब से सहमत हो या फिर असहमत, दोनों ही स्थितियों में उन्हें निलंबित रख सकती है।

लेकिन तथ्यों की कमी से नागपाल की राह जरूर आसान होगी। अपने जवाब में वह आरोपों को निराधार बता सकती है क्योंकि आरोप तो किसी पर भी लगाए जा सकते हैं।

इसके अलावा केंद्र सरकार भी प्रदेश से तथ्य और जांच रिपोर्ट तलब कर सकती है। हालांकि अभी तक जो भी रिपोर्ट सरकार को मिली हैं उनमें नागपाल को क्लीन चिट दी गयी है, चाहे रिपोर्ट गौतमबुद्धनगर केजिलाधिकारी की हो या फिर स्थानीय अभिसूचना ईकाई की।

गौरतलब है सरकार ने गौतमबुद्धनगर केएसडीएम सदर के पद पर तैनात दुर्गाशक्ति नागपाल को कादलपुर गांव में एक विवादित स्थल को गिराने के आरोप में निलंबित कर दिया था। नागपाल 2010 बैच की आईएएस अफसर हैं।
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नागपाल ने जिले में अवैध खनन पर रोक लगा दी थी और कई ट्रक, ट्रैक्टरों समेत खनन में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को जब्त किया था।

नागपाल के निलंबन के बाद सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर है और केन्द्र सरकार ने भी इस मामले में दखल देकर राज्य से रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि सरकार ने केंद्र को रिपोर्ट भेज दी है।
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