हालांकि उत्तर प्रदेश में दो महीने के बीच ब्रजेश सिंह के दो करीबियों पर हमला हुआ है, मगर एक समय ऐसा भी था जब उसने अपने विरोधियों को मात देने के लिए अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों से हाथ मिलाया था।
पुलिस के पीछा करने से परेशान ब्रजेश सिंह नब्बे के दशक में बिहार से होते हुए मुंबई चला गया। वहां उसकी मुलाकात अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के करीबी बड़ागांव निवासी सुभाष ठाकुर से हुई।
चूंकि उस समय ब्रजेश को अपने धुर विरोधी मुख्तार अंसारी को मात देने के लिए असलहों के साथ ही धन और छिपने के लिए स्थान की जरूरत थी। ऐसे में मुंबई में ब्रजेश को सुभाष ने सहारा दिया।
इसी दौरान दाऊद इब्राहिम कासकर के जीजा (हसीना पारकर के पति) की हत्या हो गई। इससे दाऊद बौखला गया। उसने पुलिस द्वारा पकड़े गए मुखबिर शैलेश हलदरकर को मारने के लिए शूटरों को लगा दिया।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 12 फरवरी 1992 को मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती शैलेश को बदमाशों ने बगल वाली छत से निशाना लगाकर मार गिराया।
ताबड़तोड़ फायरिंग में दो सिपाहियों की भी मौत हो गई थी। पुलिस की छानबीन में इस वारदात में सुभाष ठाकुर के साथ ब्रजेश का भी नाम सामने आया था।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार हत्या के बाद दोनों बदमाश तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री कल्पनाथ राय के बंगले पर गए थे। तब ऊर्जा मंत्री के सहायक श्रीप्रकाश राय ने दोनों को छिपने की जगह दी थी।
इस कारण पुलिस उन्हें नहीं ढूंढ सकी। बाद में वाराणसी आने पर पुलिस ने सुभाष ठाकुर को तो गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उससे पूछताछ के बावजूद ब्रजेश का पता नहीं चला।
पुलिस रिपोर्ट के आधार पर हत्यारोपियों को शरण देने के आरोप में टाडा अदालत ने मंत्री पद छोड़ने के बाद कल्पनाथ राय को जेल भेज दिया, जबकि सुभाष ठाकुर को आजीवन कारावास की सजा हुई।
उड़ीसा से 24 जनवरी 2008 को गिरफ्तार किए गए ब्रजेश को मुंबई कोर्ट में पेश किया गया। वहां गवाहों के मुकरने पर वह जेजे अस्पताल कांड से बरी हो गया।