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यूपी: 3 की मौत पर बवाल, पुलिस हुई बेरहम

Thu, 14 Aug 2014 07:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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मेरठ हाईवे पर डौला गांव में बुधवार को दोपहर करीब दो बजे बिजली की हाईटेंशन लाइन का तार टूटकर गिरने से रजवाहे में नहा रहे एक किशोर, दो युवक और पांच मवेशी मर गए। इस हादसे के बाद भड़के लोगों ने पहले शव रखकर जाम लगा दिया और फिर आला अफसरों के न पहुंचने पर रोडवेज बस, एंबुलेंस, कार, अस्पताल, बिजलीघर में जमकर तोड़फोड़ की। बिजलीघर में आग भी लगा दी। पुलिस पर रुक-रुककर दो घंटों तक पथराव किया, इसमें सीओ बागपत एनपी सिंह और उनके तीन हमराह घायल हो गए। बवालियों को सबक सिखाने के लिए किए लाठीचार्ज में पुलिस ने महिलाओं और बच्चों को भी सड़क पर गिरा-गिराकर पीटा। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से हालात पर काबू पाया।
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बुधवार को दोपहर के समय अंकित, शिवम और अंकित उर्फ छोटू रजवाहे में नहा रहे थे। अतर सिंह की एक गाय, एक कटड़ा, जगदीप की दो और धर्मवीर की एक भैंस भी रजवाहे में थी। तभी तारों में चिंगारी उठी और फिर एक तार गिरकर रजवाहे में गिर पड़ा। पास खड़े लोगों ने देखा अंकित, शिवम और छोटू झुलस गए। तुरंत
बिजलीघर में फोन कर लाइन कटवाई। तीनों ने मौके पर दम तोड़ दिया। वहीं पांचों मवेशी भी मर गए। इसके बाद जैसे ही लाश गांव में पहुंचीं, लोग गुस्से से आपा खो बैठे। क्षुब्ध लोगों ने शव मेरठ-बागपत हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया। डीएम-एसपी को बुलाने की मांग की, लेकिन दोनों में से एक भी मौके पर नहीं पहुंचा।
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इससे भड़की भीड़ ने गांव के बिजलीघर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। एक बाइक फूंक दी। गांव की सीएचसी में जननी सुरक्षा योजना की दो एंबुलेंस को तोड़फोड़ कर पलट दिया। एक रोडवेज बस में तोड़फोड़ कर रजवाहे में पलट दी। दो लोगों की कारों पर पथराव किया। इसके बाद पुलिस पर जमकर पत्थर बरसाए। इसमें सीओ एनपी सिंह घायल होने के बाद जैसे ही पुलिस के सामने पहुंचे, पुलिस वालों ने भी लाठीचार्ज कर दिया। एक घंटे तक रुक-रुक कर लाठी चलाई। इससे कई लोग घायल हो गए। जिला प्रशासन ने पूरा गांव छावनी बना दिया। करीब शाम साढ़े पांच बजे बवाल थम पाया।

पुलिस ने लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

करंट के कहर से हुए हादसे के बाद गम के मारे लोगों ने जब मेरठ रोड पर जाम लगाया, तब पुलिस चुप रही। थोड़ी देर बाद जब एक कार तोड़ी, तब भी कुछ नहीं बोली। सीएचसी में जब एंबुलेंस टूटी, तब भी दूर से नजारा देखा। डॉक्टर पीटे गए, पुलिस ने निपटने दिया। बिजलीघर में आग लगाई, तो भी धैर्य रखा, लेकिन जैसे ही सीओ की आंख से खून टपकते  देखा, वैसे ही पुलिस आपा खो बैठी। न कोई चेतावनी दी, न किसी अफसर के आदेश का इंतजार किया। बस लाठियां लीं, और टूट पड़े लोगों पर।

जो लोग शव लेकर जाम लगा रहे थे, उन्हें पीटा। जो महिलाएं पास में खड़ीं थी, उन पर लाठी चलाईं। कई गिरकर घायल हो गई, चूड़ियां टूटकर सड़क पर बिखर गई, चप्पल भी छूट गई, लेकिन पुलिस नहीं रुकी। बच्चे सामने आए, तो उन्हें बख्शा नहीं। कोई खेत में भागा, तो वहीं जाकर पीटा। कई लोग दौड़कर घरों में घुस गए, लेकिन लाठी की मार से खुद को नहीं बचा एक-दो बुजुर्गों ने पुलिस वालों के हाथ भी जोड़े, लेकिन उन पर जरा भी तरस नहीं किया।

पूरा घटनाक्रम दो राउंड में रहा। पहले में बलवाई हावी रहे। जो मन में आया, वो किया। न कोई रोक थी, न टोक। पुलिस तमाशबीन की भूमिका में थी। अफसर जैसे इस इंतजार में थे कि कोई मौका मिल जाए लाठी चलाने का और सीओ की आंख में पत्थर लग जाने से वह अवसर मिल गया। पुलिस ने लाठी सिर्फ भागते या पत्थर चलाते लोगों पर नहीं चलाई। जो सड़क पर चुपचाप खड़े थे, जो  घर के बाहर खड़े बवाल देख रहे थे, सभी चपेट में आ गई। एक टीम लाठी लेकर गली में दौड़ती तो दूसरी सड़क पर लाठी चलाती। एक दो बार तो पुलिस ने पत्थरों का जवाब पत्थरों से दिया। भीड़ ने पथराव किया, तो पुलिस वालों ने भी उठाकर पत्थर वापस फेंक दिए। एक सिपाही ने आंसू गैस चलाने की तैयारी कर ली, लेकिन उसे एएसपी ने रोक कर कहा कुछ देर इंतजार करो।

बस को टूटते देखती रही पुलिस
पथराव के दौरान पुलिस गांव में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। ग्रामीणों का प्लान था पुलिस को गांव में आने दिया जाए। इसके बाद चारों ओर से घेरकर पत्थर चलाए जाएंगे। यह सूचना पुलिस को मिल गई। इसी डर से पुलिस बाहर ही रही जबकि अंदर रोडवेज बस को पहले डंडों से तोड़ा गया, फिर पत्थर बरसाएं, इसके बाद उसी रजवाहे में बस को उसी जगह पलटा गया, जहां करंट से तीन लोगों की मौत हुई। पुलिस की इतनी हिम्मत भी नहीं हुई बस को जाकर बाहर निकलवा दे।
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जहां भी पुलिस जाती, वहीं पर हो जाता पथराव

डौला के लोगों का गुस्सा पहले पॉवर कॉरपोरेशन पर था। फिर डीएम-एसपी के न आने से नाराज हुए, लेकिन निशाने पर लिया पुलिस को। एक बार जो पथराव शुरू हुआ, वह दो घंटों तक चला। लाठीचार्ज के बाद भी बवाली थमे नहीं। जहां भी पुलिस नजर आती, वहीं पथराव करते। एक बार तो चार ओर से पथराव किया। इतने तेजी से पत्थर चलाए कि बहुत देर तक को पुलिस संभल नहीं पाई। कोई अफसर पेड़ के नीचे छुपा तो कोई जीप के पीछे। गांव में लोगों ने पत्थरों के ढेर लगा लिए थे। यदि पुलिस अंदर चली जाती तो न जाने कितने पुलिसवाले घायल होते।

जाम लगा रही भीड़ को समझाने के लिए विधायक लोकेश दीक्षित पहुंचे। उन्होंने कहा वे अफसरों से बात करेंगे, पीड़ितों की पूरी मदद होगी, लेकिन लोग सुनने को तैयार नहीं थे। उन्हें तो डीएम और एसपी मौके पर चाहिए थे। इसी बीच एक कार वहां पहुंच गई। उसके ड्राइवर ने कहा उन्हें मेरठ जाना है, जरा रास्ता दे दो। इसी पर भीड़ गुस्से में आ गई और कार पर पहले डंडे बरसाए, फिर पत्थर। इसके बाद जो बवाल शुरू हुआ, वह थमा नहीं। सीओ को पत्थर लगने के बाद भी भीड़ नहीं रुकी। पुलिस की लाठी की मार सह कर जो लोग गांव पहुंचे, वापस पत्थर लेकर आ गए। करीब दो घंटों तक रुक रुककर पथराव हुआ। धमकी भी देने लगे यदि गोली भी चलानी पड़ी तो चला देंगे। एक दो बुजुर्ग समझाने लगे तो उन्हें धमका दिया।

बच्चों पर भी तरस नहीं आया
बलवाइयों ने जब सीएचसी में तोड़फोड़ की, तब डॉक्टरों ने हाथ जोड़े, मरीज गिड़गिड़ाए, लेकिन पथराव नहीं रुका। एंबुलेंस तोड़ी। डॉक्टर पीटे। इसके बाद जब रोडवेज बस तोड़ी तो इसमें सवार सर्वोदय पब्लिक स्कूल के बच्चों ने हाथ जोड़े, बलवाई नहीं माने। पूरी बस तोड़कर रजवाहे में पलट दी। इसी तरह सेन्ट्रो कार तोड़ते समय ड्राइवर ने खूब मिन्नतें की, लेकिन उनकी भी नहीं सुनी।
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