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गर्मी में प्रत्येक दिन औसतन 15 से 20 ट्रासंफाॅर्मर जलते हैं
क्षमता कम होने से सिर्फ आठ से 10 ट्रांसफाॅर्मर होता है मरम्मत
क्षमता वृद्धि के लिए 70 लाख का भेजा गया प्रस्ताव, नहीं मिली स्वीकृति
कम जगह भी ट्रांसफाॅर्मर का मरम्मत कार्य में बन रहा रोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गर्मी ने मार्च से ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। बिजली निगम सुचारु रूप से विद्युत आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं दिख रहा है। मई से लेकर अगस्त माह तक तो ट्रांसफाॅर्मर जलने की घटना में अचानक वृद्धि हो जाती है। इसे बनने के लिए शहर के भटवलिया ट्रांसफाॅर्मर वर्कशाॅप पर भेजा जाता है। कम क्षमता होने की वजह से इसमें समय लग जाता है। इधर, उपभोक्ताओं को उमस भरी गर्मी में परेशान होना पड़ता है। क्षमता वृद्धि के लिए निगम ने करीब 70 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। अभी इसको स्वीकृति नहीं मिल सकी है। ऐसे में इस बार गर्मी में उपभोक्ताओं की बिजली को लेकर मुश्किल बढ़ सकती है।
जिले में 4.72 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनको बेहतर बिजली आपूर्ति करने के लिए 20,122 ट्रांसफाॅर्मर लगाए गए हैं। ओवरलोड ट्रांसफाॅर्मर की संख्या जिले में 464 है। इनकी क्षमता वृद्धि होनी है। जिले में 155 नए ट्रांसफाॅर्मर मौजूद हैं। ठंड में ट्रांसफाॅर्मर जलने की औसत संख्या प्रत्येक दिन चार से पांच रहती है। जून से लेकर अगस्त तक 20 से 25 ट्रांसफाॅर्मर प्रत्येक दिन जलते हैं।
ट्रांसफाॅर्मर मरम्मत करने के लिए जिले में एकमात्र वर्कशाॅप भटवलिया में है। इस वर्कशाॅप में ट्रांसफाॅर्मर मरम्मत करने की क्षमता प्रत्येक दिन में 10 से 12 है। अगर यही हाल रहा तो इस बार जिलेवासियों को ट्रांसफाॅर्मर जल जाने के बाद घंटों गर्मी से तर-बतर होना पड़ेगा।
वर्कशाॅप में तीन अधिकारी
ट्रांसफाॅर्मर वर्कशाॅप में एक एसडीओ व दो अवर अभियंता की तैनाती है। यहां मरम्मत का कार्य व गांव-गांव ट्रांसफाॅर्मर पहुंचाने की जिम्मेदारी ठेके पर दी गई है। वर्कशाॅप में जगह नहीं होने की वजह से मरम्मत कार्य प्रभावित होता है। जगह कम होने के चलते वर्कशाॅप पहले ही ट्रांसफाॅर्मरों से भरा पड़ा है। गर्मी में तो पैर रखने तक की जगह तक नहीं बचती है।
यही नहीं वाहन पर लादकर वर्कशाॅप आने वाले ट्रांसफाॅर्मर को गेट पर ही उतारना पड़ता है। उसे वर्कशाॅप लाने में काफी परेशानियां होती हैं। मरम्मत का कार्य 25 कर्मचारी शिफ्ट में करते हैं। जगह बढ़ने व शेड पड़ने के बाद यहां ठेके वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ जाएगी।
क्षमता बढ़ाने के लिए भेजा गया प्रस्ताव : अधीक्षण अभियंता
बिजली निगम ट्रांसफाॅर्मर वर्कशाॅप की क्षमता वृद्धि के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज चुका है। स्वीकृति मिलने की देरी है। जगह के अभाव की समस्या दूर कराने का प्रयास किया जा रहा है। ओवरलोड ट्रांसफाॅर्मर की क्षमता बढ़ाने के लिए विभाग को 20 करोड़ रुपये मिले हैं।
सलेमपुर में दशकों से बंद वर्कशाॅप के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है। वर्कशाॅप खोलने के लिए बिजली ऑफिस के पास जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। नए ट्रांसफाॅर्मर लगाए जा रहे हैं। गर्मी के मौसम में इस बार ट्रांसफाॅर्मर कम जलेंगे।
नैयर अनवर, सहायक अभियंता
तीन दशक पहले सलेमपुर में था ट्रांसफाॅर्मर का वर्कशाॅप, फिर से भेजा गया प्रस्ताव
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- वर्कशाॅप चालू हो जाए तो दूर हो सकती है ट्रांसफॉर्मर की समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। विद्युत सब स्टेशन परिसर में तीन दशक पहले ट्रांसफाॅर्मर का वर्कशाॅप हुआ करता था। इसके बंद होने के बाद लोगों को गर्मी के महीने में ट्रांसफाॅर्मर फुंकने पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ट्रांसफाॅर्मर फुंकने पर देवरिया भेजना पड़ता है। जहां से आने में एक सप्ताह तक लग जाता है।
नगर के विद्युत सब स्टेशन के पास करीब तीन दशक पहले ट्रांसफाॅर्मर का वर्कशाॅप हुआ करता था। इस वर्कशाॅप में हर माह करीब 40 ट्रांसफाॅर्मर तैयार किए जाते थे। यहां से जिले के अलावा पडरौना व गोरखपुर को ट्रांसफाॅर्मरों की सप्लाई होती थी। अगर यह वर्कशाॅप चालू हो जाता तो ट्रांसफाॅर्मर की किल्लत से निजात मिल जाती।
वर्कशाॅप विद्युत सब स्टेशन परिसर में ही चलता था। इसका कमरा आज भी मौजूद है। विद्युत सब स्टेशन के पुराने कर्मचारी बताते हैं कि उस समय वर्कशाॅप में काम करने के लिए 18 कर्मचारी हुआ करते थे। एक महीने में करीब 40 ट्रांसफाॅर्मर नए तैयार होते थे। जबकि 30 से ऊपर ट्रांसफाॅर्मर रिपेयरिंग होते थे। मंडल में सबसे तेज तेल रिफाइन करने वाली मशीन लगी थी। इस मशीन से 500 गैलन प्रति घंटा तेल रिफाइन होता था। इसके कर्मचारी रिटायर हो गए। उसके बाद वर्कशाॅप की स्थिति खराब होती गई।
लोगों का कहना है कि अगर ट्रांसफाॅर्मर वर्कशाॅप चालू हो जाए तो शायद सलेमपुर में ट्रांसफाॅर्मर की किल्लत से निजात मिल जाएगी। एक्सईएन राम हरि ने कहा कि वर्कशाॅप पहले से बंद है। मैं नया आया हूं। इसको चालू करने के लिए कोई पत्र नहीं आया है। इसके लिए प्रयास किया जाएगा।
क्या कहते हैं लोग-
पहले ट्रांसफाॅर्मर कम संख्या में थे। तब यहां वर्कशाॅप हुआ करता था। आज ट्रांसफाॅर्मर की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। ऐसे में यहां का वर्कशाॅप चालू हो जाता तो गर्मी में ट्रांसफाॅर्मर फुंकने पर ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता।
-राजन कुमार, पिपरा मोहन, वार्ड नंबर चार
ट्रांसफाॅर्मर फुंकने पर बदलकर नया आने में हफ्तों लग जाते हैं। यदि सलेमपुर का ट्रांसफाॅर्मर वर्कशाॅप चालू हो जाता तो जिले के वर्कशाॅप पर लोड कम हो जाता। समय से ट्रांसफाॅर्मर उपलब्ध हो जाता।
-अशोक गुप्ता, सभासद, पूर्वी इचौना, वार्ड नंबर छह