तरकुलवा। खजुरिया रजवाहा नहर की सफाई से निकाली गई सिल्ट के ढेर सड़कों की पटरियों पर रख दिए गए हैं। कई स्थानों पर कचरे का ढेर भी रखा है।
भवन निर्माण सामग्री के दुकानदार सड़कों के किनारे पटरियों पर गिट्टी और बालू रख रहे हैं। इससे उड़ने वाली धूल आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों के लिए मुसीबत बन गई है।
संक्रमण और सांस की बीमारी के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक है। दुर्घटना का भी खतरा बना रहता है। इसके बावजूद प्रशासन बेखबर है।
सिंचाई विभाग की ओर से क्षेत्र की खजुरिया रजवाहा की जेसीबी से सफाई कराई गई है। नहर से निकलने वाले सिल्ट को जिम्मेदारों ने सड़क की पटरियों पर ढेर लगाकर छोड़ दिया है।
इससे भिसवा, महुअवा बजराटार, गढ़रामपुर, जमुनी, तरकुलवा, पक्खन टोला, बसंतपुर धूसी, चन्हत्ता, सिरसिया गोठा आदि गांवों के आबादी के इलाके और भिसवा-गढ़रामपुर, जमुनी- त्रिमुहानी घाट मार्ग पर लक्ष्मीपुर नहर पुल से जमुनी चौराहे तक, जमुनी से सिरसिया गोठा होते हुए पथरदेवा तक नहर पटरी वाली सड़क पर सिल्ट का पहाड़ सा ढेर लगा हुआ है।
इसके अलावा तरकुलवा, सोंहुला रामनगर, बसंतपुर, पहाड़पुर, बंजरिया, बेलही, गुलहरिया, बोलबम चौराहा आदि जगहों की प्रमुख सड़कों पर भवन निर्माण सामग्री के दुकानदार सड़क की पटरियों पर अतिक्रमण कर गिट्टी व बालू का ढेर लगाए हुए हैं।
ऊपर से नगर पंचायतों और गांवों में कचरा घर बनने के बाद भी सफाईकर्मी कचरों को कस्बा और गांवों के बाहर सड़कों के किनारे खाली स्थानों पर गिरा दे रहे हैं। स्थिति यह है कि सिल्ट, सूखा कचरा और बालू हवा के साथ उड़ने से राहगीरों के लिए मुसीबत बन गए हैं। राहगीर धुंध से दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं तो एलर्जी, खासी और सांस के मरीजों को आवागमन में दुश्वारी हो रही है। आए दिन एलर्जी और सांस फूलने के मरीज सीएचसी पहुंच रहे हैं, मगर प्रशासनिक अफसर इससे बेखबर हैं। क्षेत्रीय लोगों ने सड़क की पटरियों से सिल्ट और कचरों को हटवाने की मांग की है।