पंचतत्व में विलीन हुआ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का पार्थिव शरीर
मईल/भागलपुर(देवरिया)। बरहज तहसील के इकलौते स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामीनाथ प्रजापति (97) का निधन हो गया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में रामजानकी मार्ग के पिपराबांध पुल काट कर अंग्रेजों के आवागमन एवं संसाधनों के परिवहन पर विराम लगा दिया था। भागलपुर के कालीचरण घाट पर राजकीय सम्मान के साथ बृहस्पतिवार को उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। गोड़वली गांव निवासी स्वामीनाथ प्रजापति का निधन घर पर सुबह करीब आठ बजे हुआ। इसकी खबर मिलने पर बरहज एसडीएम सुनील कुमार सिंह पहुंचे और राष्ट्रीय ध्वज उनके शव पर ओढ़ाकर सलामी दी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की बहू ममता देवी को 12 हजार नकद धनराशि दी। कुछ देर बाद शवयात्रा के साथ प्रशासनिक अधिकारी कालीचरण घाट पहुंचे। एसडीएम सुनील कुमार सिंह, सीओ अंबिका, एसओ मईल रविंद्र कुमार रवि, क्षेत्रीय लोगों ने सेनानी के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया। पुलिस टुकड़ी ने गार्ड आफ आनर दिया। बड़े पौत्र ओमकार प्रजापति ने मुखाग्नि दी। इस दौरान नायब तहसीलदार संजय पांडेय, रामचंद्र प्रजापति, चंद्रशेखर प्रसाद, सतीश जायसवाल आदि मौजूद रहे।
इकलौते बेटे से मिलने की हसरत रह गई अधूरी
तिहाड़ जेल में सजा काट रहा बेटा, कहीं नहीं हुई सुनवाई
मईल। देश की आजादी में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामीनाथ प्रजापति की बेटे से मिलने की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी। तिहाड़ जेल से सजा काट रहे बेटे से मिलने की उनकी हसरत थी। इसके लिए कई बार अफसरों से गुहार लगा चुके थे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
भागलपुर ब्लॉक के गोड़वली निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामीनाथ प्रजापति (97) के इकलौते बेटे के नाम रामध्यान है। उसकी तैनाती आजमगढ़ में पीएसी 20वीं वाहनी में आरक्षी पद पर थी। जनवरी-2005 में विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में ड्यूट लगी थी। 28 फरवरी-2005 को ड्यूटी समाप्त होने पर बटालियन के साथ वापस जाने के लिए वाराणसी बांस फाटक के पास खड़ी बस में बैठने पहुंचे थे कि पहले से बस में बैठे उसके कुछ साथी चिढ़ा दिए। गुस्से में रामध्यान ने गोली चला दी। गोली लगने से पीएसी के तीन जवान और सड़क पर फूल बेच रहे माली की मौत हो गई थी। इस मामले में उसे दस साल का सश्रम सजा हुआ था। सजा काटने के बाद रामध्यान घर आकर खेती किसानी में जुट गए थे।1987 में ड्यूटी के दौरान मेरठ में हुए दंगे के दौरान 19 पीएसी जवानों पर मुकदमा चल रहा था, जिसमें सेनानी के पुत्र रामध्यान भी शामिल थे। 14 माह पूर्व हाईकोर्ट की ओर से उम्र कैद की सजा सुनाई गई सजा वह तिहाड़ जेल में काट रहे हैैं। दो माह से स्वतंत्रता सेनानी बीमार थे। रामध्यान की पत्नी ने पैरोल के लिए कोर्ट एवं राज्यपाल के यहां अर्जी लगाई, लेकिन सेनानी की बहू की कहीं भी सुनवाई नहीं हुई और जिगर के टुकड़े से आखिरी बार बिना मिले स्वतंत्रता सेनानी ने दुनिया को अलविदा कह दिया।