रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित चौकी प्रभारी जेल भेजा गया
देवरिया। करीब नौ माह से अधिक समय से फरार निलंबित दरोगा को भष्ट्राचार निवारण कोर्ट गोरखपुर ने जेल भेज दिया है। आरोपी दरोगा ने वाराणसी के एक व्यक्ति से ऑनलाइन दस हजार रुपये घूस के तौर पर लिए थे। इस मामले में एसपी ने जुलाई में दरोगा और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया था। पीड़ित व्यक्ति की तहरीर पर तीनों के खिलाफ मईल थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था।
मईल थाने के भागलपुर पुलिस चौकी के प्रभारी पद पर तैनात रहे दरोगा अमित पांडेय, सिपाही उदय राज राव और कमलेश यादव पर आरोप था कि जुलाई में कुछ लोगों को फर्जी एआरटीओ करार देकर थाना क्षेत्र के कुंडौली गांव के पास से पकड़ लिया। इसके बाद थाने लाने के बाद पूछताछ कर रकम लेकर छोड़ा। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उनके वाहन को ट्रक ने ठोकर मार दिया था। पुलिस ने उनकी एक न सुनी। फर्जी एआरटीओ होने का आरोप लगाकर उन्हें पकड़ ली। काफी प्रयास के बाद छोड़ने के लिए पुलिसकर्मियों ने पचास हजार रुपये की मांग की। नकद रुपये न होने पर किसी तरह दस हजार रुपये की व्यवस्था कर पीड़ित ने उन्हें दिया। पीड़ित से दरोगा ने एक सिपाही के मोबाइल फोन पर गूगल पे के जरिए दस हजार रुपये मंगवा लिए और सभी को छोड़ दिया।
आरोपितों ने पुलिस के चंगुल से छूटने के बाद डीआईजी से शिकायत कर झूठे मुकदमे फंसाने की धमकी देकर तत्कालीन चौकी प्रभारी अमित पांडेय और अन्य पर घूस लेने का आरोप लगाया था। डीआईजी ने जांच कराई तो मामला सही पाया गया। एसपी ने दरोगा सहित तीन पुलिसकर्मियों को दो जुलाई 2021 को निलंबित कर दिया। इस मामले तीन वाराणसी जनपद के खोजवा बाजार निवासी रजत कुमार मिश्र की तहरीर पर तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि दरोगा और सिपाहियों ने पाकेट से 72 सौ रुपये भी निकाल लिए थे। जांच गोरखपुर ब्रांच को मिली। निलंबित दरोगा अमित पांडेय सात अप्रैल को गोरखपुर भष्ट्राचार निवारण कोर्ट में हाजिर हुआ, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस बारे में बरहज के सीओ देवआनंद ने कहा कि निलंबित दरोगा ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। उसके बारे में गोरखपुर से जानकारी मिली है। मामले की जांच गोरखपुर भष्ट्राचार निवारण संगठन के अधिकारी कर रहे हैं।
निलंबित दरोगा ने डाक से भेजा था इस्तीफे का पत्र
देवरिया। जेल गए निलंबित दरोगा अमित पांडेय के खिलाफ जब मुकदमा दर्ज हुआ था तो उसी समय उसने एसपी को इस्तीफा देने का पत्र डाक से भेज दे दिया था। पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। पत्र डाक के माध्यम से भेजने के बाद अमित पांडेय बयान दर्ज कराने और हस्ताक्षर प्रमाणित कराने के लिए उपस्थित नहीं हुआ।