सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी रिकॉर्ड रूम में फंसे 14 गांवों के अभिलेख
रुद्रपुर। राप्ती और गोर्रा नदी के प्रवाह से बदले भूगोल के अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण के नाम पर वर्षों से काश्तकारों का शोषण हो रहा है। सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 14 गांवों के अभिलेख आठ साल से रिकॉर्ड रूम में फंसे हैं। प्रक्रिया में लेटलतीफी से रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के सर्वेक्षण में पड़े गांवों में आज भी तमाम मृतकों के नाम से जमीन है।
बाढ़ प्रभावित इलाके में नदी के कटान से बदले भूगोल को दुरुस्त करने के लिए भूलेख विभाग गांवों का रिकॉर्ड दुरुस्त करता है। रुद्रपुर क्षेत्र में 25 साल से 50 गांवों का सर्वेक्षण हो रहा है। तहसील से उनके सारे रिकॉर्ड सर्वे विभाग को दे दिए गए हैं। इनमें 14 गांवों का सर्वेक्षण कार्य आठ वर्ष पहले पूरा हो गया। इन गांवों का खेसरा, खतौनी और मानचित्र जांच के बाद सहायक अभिलेख अधिकारी गोरखपुर के अभिलेखागार में जमा है। गांवों के नोटिफिकेशन के लिए शासन में आठ साल से फाइल पड़ी है। सर्वे पूरा होने के बाद भी नोटिफिकेशन नहीं होने से तमाम लोगों का वरासत नहीं हो पा रहा है। सर्वेक्षण में गए गांवों का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन नहीं हुआ है। इस कारण इन गांवों के राजस्व अभिलेख में मृतक हो चुके काश्तकारों के वारिस का नाम दर्ज नहीं हो पा रहा है। जिलाधिकारी और जिला अभिलेख अधिकारी आशुतोष निरंजन ने राजस्व अनुभाग के अपर मुख्य सचिव को सर्वेक्षण पूरा हो चुके गांवों का नोटिफिकेशन कराने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने वर्षों से लंबित मामले में राजाज्ञा जारी कराकर समस्त अभिलेखों को तहसील और राजस्व अभिलेखागार में जमा कराने का अनुरोध किया है। डीएम के पत्र के तीन माह बाद भी शासन स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। इस बाबत एसडीएम संजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि जिला प्रशासन और राजस्व परिषद की ओर से सर्वे कार्य पूरा हो चुके 14 गांवों के नोटिफिकेशन के लिए प्रयास हो रहा है। इन गांवों का रिकॉर्ड तहसील में वापस नहीं आने से काश्तकारों को परेशानी हो रही है। संवाद
इन गांवों का पूरा हो चुका है सर्वेक्षण
केवटलिया, पटवनिया, बिसुनपुरा, जंगल डोमलडिला, खोपा, लीलापुर भैसहा, रतनपुर, बिसुनपुर बगही, हौली बलिया, बकरूआ, माझानारायण, भगवान माझा उर्फ बेलवा, जगरनाथपुर और बसडिला।