नलकूपों को सौर ऊर्जा से चलाने की तैयारी।
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लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे राजकीय नलकूपों और लघु डाल नहरों को सौर ऊर्जा से चलाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को समय से सिंचाई करना आसान होगा। समय से सिंचाई होने पर न केवल फसल की उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि खाद्य सुरक्षा में वृद्घि होगी। पहले चरण में 6076 राजकीय नलकूपों और 57 लघु डाल नहरों को शामिल किया गया है।
सूबे के राजकीय नलकूप और लघु डाल नहरों के स्वतंत्र फीडर से निजी विद्युत संयोजन होने से लो वोल्टेज, ट्रिपिंग, फ्लक्चुएशन की समस्या बनी रहती है। जिसके चलते मोटरों के जलने में इजाफा होता है। बिजली आने और जाने का भी कोई समय निश्चित नहीं है। सूबे के 15000 राजकीय नलकूप और 200 लघु डाल नहरों के उपकरण अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। जिन्हें बदलने की जरूरत है।
लो वोल्टेज की समस्या से सूबे के 6000 राजकीय नलकूप और 200 लघु डाल नहरें प्रभावित हैं। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने सूबे के किसानों के लिए क्लीन और ग्रीन ऊर्जा की पहल की है। प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन दीपक सिंघल ने सौर ऊर्जा और ग्रिड ऊर्जा के हाईब्रिड मॉडल से संचालित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। उन्होंने अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि सौर ऊर्जा के उत्पादन से ग्रिड पावर पर निर्भरता कम होगी। बचत की गई ग्रिड ऊर्जा को अन्य मकसद के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। यह प्रदेश के विकास में सहायक होगा।