गौरी बाजार। साढ़े तीन माह पहले तक श्रवण जायसवाल का परिवार खुशहाल था। रामलक्षन चौराहे पर अच्छी दुकानदारी चल रही थी। पति-पत्नी इस तैयारी में थे कि बेटों और बेटी की शादी करके घर आगे बढ़े, मगर बड़े बेटे की सड़क हादसे में मौत ने इस घर की खुशियों को छीन लिया।
शुक्रवार की रात पिता-पुत्र की मौत ने घर को बर्बाद ही कर दिया। दो बेटों और पति को खो चुकी गुड्डी देवी खुद को नहीं संभाल पा रही थी। वहीं घर में बची इकलौती बेटी अवंतिका का आगे का जीवन कैसे कटेगा, यह सवाल सबको परेशान किए था।
गौरी बाजार नगर के वार्ड संख्या-2 निवासी श्रवण कुमार जायसवाल की तीन संतानों में बड़ा पुत्र श्वेतांत जायसवाल (31), दूसरा पुत्र राकेश जायसवाल (24) और पुत्री अवंतिका जायसवाल (22) हैं। तीनों की शादी नहीं हुई है। बड़े पुत्र ने रामलक्षन चौराहे पर रेडीमेड कपड़ा का दुकान खोली थी। छोटा भाई भी दुकान में हाथ बंटाता था।
आठ मार्च को दुकान बंद कर श्वेतांत जब घर लौट रहा था तो सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। बड़े पुत्र की मौत से पिता श्रवण और मां गुड्डी देवी सहित परिवार गम में डूब गया। कुछ दिन दुकान बंद रही, जिससे पूंजी डूब गई। छोटे पुत्र राकेश ने पिता को समझा-बुझाकर फिर से दुकान खोलवाई। दुकान ठीक से चल नहीं रही थी और कर्ज बढ़ता जा रहा था।
बेटी अवंतिका ने बताया कि शुक्रवार को पिता व भाई दुकान से घर आए। रात में आठ बजे दुकान के लिए कपड़ा खरीदने चौरीचौरा के लिए बाइक से निकले। हम लोगों ने रात को जाने से मना किया, मगर नहीं माने।
घर से निकलते ही शुरू हो गया झगड़ा : बताया जा रहा है कि घर से निकलते वक्त पिता बड़े पुत्र की मौत से बेहद दुखी थे। कुछ कर्ज भी था। छोटे पुत्र ने दुकान के लिए कर्ज पर कपड़ा खरीदने की बात कही तो पिता ने मना कर दिया। दोनों के बीच इसी बात पर कहासुनी होने लगी। चौरीचौरा कस्बे से देर रात लौटते समय भी दोनों क बीच अनबन बनी रही।