बरहज। पिछले चार दिनों से सरयू के जलस्तर में निरंतर नरमी नोट किया जा रहा है। नदी के पीछे हटने के बाद भी बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों की दुश्वारियां बरकरार है। जिससे लोग सांसत में हैं। हालांकि सरयू खतरे के निशान 66.50 से 80 सेमी ऊपर 67.30 मीटर पर बहने लगी है। वहीं राप्ती का जलस्तर 70.05 मीटर पर स्थिर बताया जा रहा है।
नेपाल के बैराज से छोड़े गये पानी से सरयू में भी उफान आ गया था। जिससे नदी का जलस्तर इस वर्ष के उच्चतम लेबल 68.05 मीटर तक पहुंच गया था। सरयू और राप्ती के करवट लेने से बाढ़ का पानी परसियां देवार के पीडबल्यूडी बांध तक, विशुनपुर देवार के कत्लहवा, स्कूलहिया, बरमहवां, बांके, जवाहर टोला, नई-पुरानी दलित बस्ती सहित 12 मजरों तक पहुंच गया है। वहीं करीब दो माह से चारो ओर से राप्ती की बाढ़ के पानी से घिरा होने के कारण भदिला प्रथम गांव टॉपू बना हुआ है। पिछले दिनों से नदी के पीछे हटने से लोगों ने राहत महसूस किया है। लेकिन दुश्वारियां ज्यों की त्यों बनी हुई है। लोगों का कहना है कि नदी के पीछे हटने से जलजमाव वाले क्षेत्रों से दुर्गंध उठने लगा है। जिससे संक्रामक बीमारियों का डर सताने लगा है। परसियां-विशुनपुर देवार में अभी तक राहत सामग्री नहीं पहुंचा है। जिसके कारण लोगों में नाराजगी है।
इंसेट में-
तीन ट्रकों से तहसील पहुंची 1800 राहत सामग्री किट
बरहज। सरयू और राप्ती नदी में आई बाढ़ से भदिला प्रथम गांव के अलावा परसियां-विशुनपुर देवार के 12 मजरों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। चारो ओर पानी ही पानी हो जाने से गांवों का संपर्क मार्ग डूब गया है। जिससे लोगों की जिंदगी गांवों में सिमट कर रह गई है। जरूरत पर आवाजाही के लिए नाव सहारा बना हुआ है। किसी तरह लोगों का दिन तो कट जा रहा है, लेकिन रात काटना मुश्किल हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासन की ओर से अभी भी राहत सामग्री नहीं बाटी जा सकी है। रविवार को तीन ट्रकों में राहत सामग्री के करीब 1800 राहत सामग्री किट तहसील पहुंची है। पूर्व में भदिला प्रथम गांव में 535 राशन किट वितरित किया जा चुका है। परसियां देवार में 1500, जबकि विशुनपुर देवार में 300 पैकेट राहत सामग्री बांटा जाना है।
कोट-
सरयू नदी निरंतर पीछे हट रही है। ऐसे ही रहा तो जल्द ही हालात सामान्य हो जायेंगे।
उपेंद्र कुमार सहायक अभियंता, बाढ़ खंड विभाग देवरिया