गुरु अंगद देव का मनाया गया प्रकाश पर्व
देवरिया। गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा न्यू कालोनी में रविवार को हर्ष एवं उल्लास के माहौल में सिख धर्म के दूसरे गुरु अंगद देव का प्रकाश पर्व मनाया गया। ग्रंथी दामोदर सिंह के नेतृत्व में सिख संगत ने गुरुवाणी एवं शबद कीर्तन का पाठ किया। जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल, सतनाम..., वाहे गुरु के जयघोष से माहौल भक्तिमय रहा।
गुरुद्वारे के ग्रंथी दामोदर सिंह ने कहा कि गुरु अंगद देव जी का जन्म सन 1504 ईसवी में हुआ था। यह वर्ष गुरु अंगद देव की 518वीं जन्म जयंती है। इनके नेतृत्व में ही लंगर की व्यवस्था का व्यापक प्रचार हुआ। अंगद देव जी का असली नाम भाई लहना था। एक बार उन्होंने गुरु नानक जी का एक गीत सुन लिया। इसके बाद उन्होंने गुरु नानक देव जी से मिलने का मन बनाया। कहते हैं कि गुरु नानक देव से पहली मुलाकात में ही गुरु अंगद देव का चरित्र बदल गया। और वह सिख धर्म अपनाकर कतारपुर में रहने लगे। उन्होंने ही गुरुमुखी की रचना की और गुरु नानक देव की जीवनी लिखी थी। गुरु और सिख धर्म के प्रति उनकी आस्था को देखकर गुरु नानक देव ने उन्हें दूसरे नानक की उपाधि दी और गुरु अंगद देव नाम दिया। कहा जाता है कि गुरु बनने के लिए नानक देव ने इनकी सात परीक्षाएं ली थीं। पहले गुरु के ज्योति में विलीन होने के बाद गुरु अंगद देव ने उनके उपदेशों को आगे बढ़ाने का काम किया। शबद कीर्तन ज्ञानी दामोदर सिंह, चांदनी, भगवंत कौर ने मिलकर किया। समापन के बाद सिख संगत सहित अन्य पंथ के लोगों ने भी उत्साह संग लंगर छका। इस दौरान एसीजीएम शिवेंद्र कुमार मिश्र, सरदार सर्वजीत सिंह, सरदार हरजीत सिंह, सरदार जगजीत सिंह, डॉ. पवन अरोड़ा, सरदार पुनीत सिंह, एनसीसी के नायब सूबेदार राजविंदर सिंह, विमल वर्मा, अमित मोदनवाल, रूबी कौर, रविंद्र सिंह, सतपाल सिंह, महेंद्र सिंह, चरनजीत कौर, जगजीत सिंह होरा, सीता मृगवानी, राजेश तारकेश्वर, सरदार हरजीत सिंह, जसप्रीत सिंह, भूपेंद्र सिंह, राजेश मृगवानी आदि मौजूद रहे।