भतीजी की बरात 24 अप्रैल को आनी है। लोग ताना मारते थे। घर पर अकेले बेटी थी। हमने सोचा कि इससे अच्छा मौका अब नहीं मिलेगा। जल्दी-जल्दी दुकान बंद किया और घर पहुंचने के बाद साजिश रची। नदी के किनारे पहले बोरे में बालू भरकर रख दिया। इसके बाद घर आया और बेटी को बुलाया और कहा कि बोरे में अनाज लेकर आया हूं। अकेले नहीं आ पाएगा, चलो साथ लेकर आते हैं।
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बेटी जब नदी घाट पर पहुंची और आगे-आगे चलने लगी और ज्योंही झुककर बोरा उठाई तो दुपट्टे से उसका गला कस दिया और पैर से दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद बोरे से बांध कर उसे फेंक दिया कि उसका शव सड़ जाएगा और राज नहीं खुलेगा।
मां ने पुलिस को अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी थी। जिस पर मुकदमा दर्ज हुआ। जब मामले का खुलासा हुआ तो यह बात सामने आई कि उसका पति ही हत्या आरोपी है। हालांकि पत्नी शकीना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रही है। उसने बताया कि पुलिस ने दबाव बनाकर जुर्म कबूल कराया है। हमारे पति निर्दोष हैं।
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प्रेमी अभी भी पुलिस हिरासत में
सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी ने बताया कि किशोरी की हत्या पिता ने ही किया था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रेमी की भूमिका हत्या करने में नहीं रही है। अन्य पहलुओं पर जांच पड़ताल की जा रही है। उसकी भूमिका के बारे में पूछताछ के लिए रखा गया है। विधिक राय लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जुलाई 2014 में तरकुलवा थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरा में प्रेमी युगल का शव मिला था। मामले का खुलासा हुआ तो पता चला कि दोनों झूठी शान की चक्कर में जान गवां बैठे थे। 2021 में महुआडीह थाना क्षेत्र में ही एक लड़की को परिजनों ने इज्जत की खातिर मार डाला था।
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इसी तरह बरहज थाना क्षेत्र के एक गांव में प्रेम विवाह करने के चलते पिछले साल महिला की हत्या कर दी गई थी। करीब सात वर्ष पहले जौनपुर के दो युवकों को युवती के परिजनों ने मारकर नदी में फेंक दिया था, जिनका शव बरामद नहीं हुआ। 2014 में भटनी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी सगी दो बहनों को परिजनों ने प्रेम संबंध के कारण हत्या कर दी थी।
संत विनोबा पीजी कॉलेज की मनोविज्ञान की विभागध्यक्ष डॉ. नाजिश बानो ने कहा कि बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने की जरूरत है। वह किस दिशा में जा रहे हैं, इस पर नजर रखना चाहिए। इस तरह की घटनाएं भावनाओं को ठेस लगने के कारण होती है। घटना रोकने के लिए सबसे जरूरी है कि अपनी संतान के बारे में पूरी जानकारी रखें और धैर्य पूर्वक समझाएं।
रिटायर्ड डीआईजी डॉ. श्रीपति मिश्र ने कहा कि हर अभिभावक को अपनी संतान को लेकर सर्तक रहना चाहिए। इसमें सबसे अधिक भूमिका मां की होती है। पूरे परिवार के साथ दोस्त की भूमिका होनी चाहिए। हर गतिविधि पर नजर रहना चाहिए। पुलिस को पूरी सजगता के साथ ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।