रुद्रपुर। पिंडरा पुल के एप्रोज पर कटान रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग सिर्फ मिट्टी डाल रहा है। इस अस्थाई कार्य से एप्रोच को बरसात के मौसम में बचाए रखना मुश्किल लग रहा है।
यहां चार साल से गोर्रा नदी एप्रोच पर ठोकर मार रही है। 2022 में एप्रोच और सड़क कटने से रुद्रपुर-करहकोल मार्ग बंद हो गया था। तब से हर साल बरसात के मौसम में चार महीने बड़ी गाड़ियों की आवाजाही रोक दी जाती है। पिंडरा पुल के एप्रोच पर हो रहे कटान का मामला पिछले माह गोरखपुर के सर्किट हाउस में सीएम की समीक्षा बैठक में भी उठाया गया था।
एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने इसके महत्व और कटान से रास्ता रुकने से परेशानी को इंगित करते हुए स्थाई निदान की मांग की थी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी कटान स्थल पर मिट्टी गिराकर आवागमन तो बहाल रखा है, मगर सरयू का जलस्तर बढ़ने पर यह काम आने वाला नहीं है।
विशेषज्ञों की टीम के स्थल निरीक्षण के बाद यहां पुल का दो स्पान बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। प्रस्तावित परियोजना पर सेतु निगम काम करेगा, मगर दो साल से परियोजना की स्वीकृति का मामला शासन में अटका हुआ है। इधर क्षेत्रवासी कटान की संवेदनशीलता को लेकर परेशान है।
ग्राम प्रधान मनोज सिंह ने कहा कि नदी के रुख बदलने से न केवल एप्रोज बल्कि गांव के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। रुद्रपुर से करहकोल होकर गोरखपुर, मऊ और बनारस को जाने वाली यह सड़क क्षेत्र की लाइफ लाइन है।
इस कारण दोआबा के 52 के अलावा कछार के 64 गांवों के लोगों की आर्थिक क्षति हो रही है। पिंडरा निवासी संजय सिंह ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा पर चार साल से खतरा बने रहने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
नदी के रुख से सड़क, पुल और गांव तीनों का अस्तित्व खतरे में पड़ा है। सरकार इस अहम समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही।