चार साल में बनना था, आठ साल में भी पूरा नहीं हुआ पुल
39 पिलर पर होना है मोहन सेतु का निर्माण, 9557.38 लाख है अनुमानित लागत
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। मऊ जनपद की राह आसान करने के लिए चार साल में बनने वाला मोहन सिंह सेतु आठ साल बाद भी तैयार नहीं हो सका है। संशोधित बजट के इंतजार में कार्य ठप पड़ा है। धीमी गति से हुए कार्य के कारण 39 खंभों में केवल 11 का ही निर्माण हो पाया है। इससे दोनों जनपदों के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
27 फरवरी 2014 को स्वीकृति मिलने के बाद पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया गया। इस पर 9557.38 लाख की लागत से 39 खंभों पर करीब 1200.08 मीटर लंबा, 7.5 मीटर चौड़ा और 11.33 मीटर ऊंचाई वाला पुल बनाया जाना है। 11 खंभों पर छत जबकि शेष खंभों पर कार्य होना है। निगम ने शासन को भेजी गई कार्य प्रगति रिपोर्ट में बताया है कि मोहन सेतु निर्माण में अब तक करीब 68 प्रतिशत कार्य पूरा हो पाया है। धीमी गति से हुए कार्य के कारण पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ और बजट भी बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के सचेतक रहे मोहन सिंह के निधन पर अंत्येष्टि में आए पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने लोगों की मांग पर पुल निर्माण कराने का आश्वासन दिया था।
इंसेट में-
सरयू नदी पार के गांवों के अलावा अन्य जनपदों के लिए आसान होगी राह
बरहज। सेतु का कार्य पूर्ण हो जाने पर नदी पार के गांवों परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा मऊ, आजमगढ़, बलिया और बनारस आदि जनपदों में आवागमन के लिए राह आसान हो जाएगी।
कोट
पिता के नाम पर शासन की ओर से पुल निर्माण कार्य शुरू होने से नगर-क्षेत्र के लोगों में काफी उम्मीद जगी थी। पुल का न बनना राजनैतिक विद्वेष को दर्शाता है। पुल के बनने से हजारों की संख्या में लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यात्रियों के साथ नदी पार के किसान भी लाभान्वित होंगे।
-कनकलता सिंह, पूर्व राज्यसभा सदस्य और दिवंगत मोहन सिंह की पुत्री
कोट
मोहन सेतु निर्माण के लिए शुरुआती दिनों से संघर्ष किया जा रहा है। आठ अक्तूबर 2013 को दिवंगत मोहन सिंह के नाम पर पुल निर्माण के लिए 27 पन्ने का पत्रक दिया गया था। स्वीकृति मिलने के बाद विभाग ने कार्य शुरू कराया। आज तक पुल न बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
-निशिकांत दीक्षित अध्यक्ष, मोहन सेतु निर्माण संघर्ष समिति
पुल का बनना नदी पार के गांवों के लिए बेहतर होगा। पुल बन जाने पर गांवों के विकास के साथ-साथ अन्य जनपदों की दूरी कम हो जाएगी। वहीं, खेती-किसानी, दुग्ध व्यवसायी, नौकरीपेशा, विद्यार्थियों आदि को काफी सहूलियत होगी।
-अजय प्रताप सिंह, प्रगतिशील किसान और समाजसेवी
सेतु निर्माण के पीछे कहीं न कहीं विभागीय मामल फंसा हुआ है। इससे निर्माण कार्य में अड़चन पैदा हो रही है। अब तक पुल न बनने से नदी पार के गांवों का विकास काफी पीछे छूट गया है। पुल बनने से गांवों का विकास संभव होगा।
- दुर्गा सिंह समाजसेवी
कोट
धन के अभाव में इस सीजन में कार्य नहीं हो पाया है। पुल निर्माण के लिए संशोधित बजट का इंतजार है। बजट मिलने पर कार्य पूरा हो जाएगा।
-एसपी सिंह, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर बरहज मोहन सेतु