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बोर्ड परीक्षा: बदनाम केंद्रों पर नकल रोकना बनेगी प्रशासन के लिए चुनौती

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कई दागी कॉलेज भी बने परीक्षा केंद्र
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यूपी बोर्ड : ऐसे केंद्र पर नकल रोकना बनेगा प्रशासन के लिए चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। यूपी बोर्ड परीक्षा में जिला प्रशासन भले ही शुचितापूर्ण ढंग से परीक्षा कराने के दावे कर रहा हो, नकलविहीन परीक्षा कराना उसके लिए चुनौती से कम नहीं होगा। जनपद में बने 215 परीक्षा केंद्रों पर अधिकांश ऐसे विद्यालय भी केंद्र बने हैं, जिनका दागी इतिहास रहा है। कुछ वर्ष पहले तक डिबार रहे स्कूलों को भी इस बार सेंटर बना दिया गया है। उधर, नकल माफिया भी एक बार पुन: सक्रिय हो गए हैं।
18 फरवरी से शुरू हो रही बोर्ड परीक्षा में जनपद बीते कुछ सालों में नकल के लिए काफी चर्चित रहा है। हर साल करीब 20 केंद्रों को अतिसंवेदनशील व संवेदनशील श्रेणी में रखे जाने से भी यह साफ है कि नकलविहीन परीक्षा कराना आसान नहीं होगा। दूर-दराज के इलाकों में बने परीक्षा केंद्रों पर नकल माफिया परीक्षा के नजदीक आते ही ज्यादा सक्रिय दिखने लगे हैं। जब परीक्षा केंद्रों का निर्धारण हो रहा था, तभी से दागी रहे केंद्रों के संचालक जोड़-तोड़ में जुटे थे। सूची घोषित होने के बाद वे अपने विद्यालय को सेंटर बनवाने में कामयाब भी हो गए। अफसरों की मेहरबानी से जिले की विभिन्न तहसील क्षेत्रों में दागी रहे स्कूलों को भी केंद्र बना दिया गया है। इनमें कई ऐसे हैं जो निर्जन इलाके में तथा पुलिस की पहुंच से दूर हैं। यहां पर कनेक्टिविटी भी बड़ी समस्या होगी। दूर के इलाकों में किसी गड़बड़ी पर पुलिस बल को बुलाना भी आसान नहीं होगा।
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215 केंद्रों की निगरानी को स्थापित किए गए 15 कम्प्यूटर
जीआईसी में बने कंट्रोल रूम से जिले में बने 215 परीक्षा केंद्रों की वेबकास्टिंग के जरिए मानीटरिंग को कुल 15 कंप्यूटर स्थापित किए गए हैं। डीआईओएस शिवचंद राम ने बताया कि सभी केंद्रों को इससे कनेक्ट कर दिया गया है। राउटर व डीबीआर के जरिए यहां हो रही हर गतिविधि को लाइव देखा जा सकता है। कनेक्टिविटी पर्याप्त रहे, इसके लिए केंद्र व्यवस्थापकों को 4-जी सीम का प्रयोग ही करने को कहा गया है। 4425 कक्ष निरीक्षक, हर केंद्र पर एक-एक अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक, आठ सचल दल तैनात किए गए हैं। शासन के निर्देशों के अंतर्गत नकल रोकने के हर इंतजाम इस बार किए गए हैं। पर्याप्त संख्या में पुलिस बल भी केंद्रों पर मौजूद रहेंगे।
वित्तविहीन शिक्षक संघ ने नेट की स्पीड बढ़ाने की उठाई मांग
वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षक ने ग्रामीण क्षेत्र में लगे मोबाइल टॉवरों की क्षमता बढ़ाने की मांग की है। रविवार को प्रदेश महासचिव मुमताज अली ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो मोबाइल टॉवर लगे हैं, उन पर उपभोक्ताओं का ओवरलोड है। नेट की स्पीड काफी धीमी है। इससे जिला कंट्रोल रूम से संपर्क नहीं हो रहा है। सरकार इसे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करें, ताकि सही तरीके से परीक्षा केंद्रों की मानीटरिंग हो सके। अधिकांश केंद्रों पर निगरानी से संबंधित सभी यंत्र लगाए जा चुके हैं, लेकिन ओवरलोड के चलते कंट्रोल रूम से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
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प्रमाण पत्र के लिए चार साल से काट रही चक्कर
करुअना। क्षेत्र के सोनाड़ी इंटर कॉलेज की छात्रा हाईस्कूल के प्रमाण पत्र के लिए पिछले करीब चार साल से कार्यालयों के चक्कर काट रही है। वह डीआईओएस और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से भी शिकायत कर चुकी है। वह प्रमाण पत्र न मिलने और विभागीय लापरवाही का खामियाजा भुगत रही है। जिससे उसकी आगे की पढ़ाई बाधित है। सोनाड़ी गांव निवासी रामनारायन सिंह की पुत्री खुशी इंटर कॉलेज की छात्रा थी। सन 2016 में उसने हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। किन्हीं कारणों से उसका प्रमाण पत्र नहीं आ सका है। उधर, प्रधानाचार्य बंकेश्वर मिश्र ने खुशी सिंह के प्रमाण पत्र के बारे में विभाग को अवगत कराया गया है।
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