देवरिया। भाटपाररानी थाना क्षेत्र में नौ वर्ष पुराने विवाहिता की दहेज मृत्यु के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम हरीराम की अदालत ने पति योगेंद्र यादव को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दहेज के लिए प्रताड़ित करने के अपराध में उसे दो वर्ष और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी दी गई है।
दोनों अपराधों में पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जेल में पहले बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
बिहार के सिवान जिले के तितरा मिश्रौली निवासी विक्रम यादव ने अपनी बेटी लालसा कुमारी की शादी 29 मई 2014 को भाटपाररानी थाना क्षेत्र के मलहचक निवासी योगेंद्र यादव के साथ की थी। लालसा का गौना 24 अप्रैल 2017 को हुआ था। अभियोजन के मुताबिक गौना के कुछ दिन बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज में 50 हजार रुपये और बाइक की मांग की जाने लगी। लालसा ने मोबाइल फोन से इसकी जानकारी अपने मायके वालों को दी थी।
पिता ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात कहते हुए मांग पूरी करने में असमर्थता जताई थी। अभियोजन का आरोप था कि 22 जुलाई 2017 की रात लालसा की मौत हो गई और इसके बाद उसका शव गांव के पास गंडक नदी के किनारे मिला था। पिता को फोन से घटना की जानकारी मिली तो वह महाराष्ट्र के पुणे से देवरिया पहुंचे। 27 जुलाई 2017 को भाटपाररानी थाने में योगेंद्र यादव समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
विवेचना के बाद पुलिस ने योगेंद्र यादव पर दहेज उत्पीड़न, दहेज मृत्यु और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे गए।
पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने योगेंद्र यादव को दहेज उत्पीड़न, दहेज मृत्यु और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अपराध में दोषी पाया। हालांकि, हत्या की वैकल्पिक धारा और आपराधिक साजिश के आरोप में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे दोषमुक्त कर दिया गया।