पडरौना। सात समंदर पार खाड़ी देशों के आसमान से बमबारी, मिसाइलों की बारिश और गूंजते सायरन ने वहां रह रहे भारतीयों की रातों की नींद छीन ली है। होली व ईद पर वतन आने वाले कामगारों के लिए इस बार त्योहार का मतलब केवल अपनों की सलामती तक सिमट गया है। खाड़ी देशों में फंसे कामगारों के परिजन सिर्फ उनकी सकुशल वतन वापसी को लेकर चिंतित हैं। परिजनों के दिन का चैन और रात की नींद उड़ गई है। सहारा सिर्फ मोबाइल फोन ही है, जो उन्हें अपने से बात कर तसल्ली दिला रहा है। लेकिन दोनों देशों के बीच संघर्ष की भयावहता को लेकर अनिश्चतता का माहौल बना हुआ है। इसके चलते लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
हवाई सेवा बंद, वतन वापसी पर संकट
28 फरवरी से ईरान-इस्राइल के बीच शुरू हुए संघर्ष को लेकर हवाई सेवाएं बंद हो गई हैं। इसलिए खाड़ी देशों में फंसे लोगों का इस बीच वतन वापसी पर संकट है। यह हवाई सेवाएं युद्ध को देखते हुए बंद की गई हैं। इन देशों से वतन तक पहुंचाने वाली एयर इंडिया और एमिरेट्स जैसी बड़ी एयरलाइंस ने अपनी उड़ाने स्थगित कर दी हैं। इसका सीधा असर उन प्रवासियों पर पड़ा है, जिन्होंने महीनों पहले त्योहारों के लिए छुट्टियां ली थीं।
कप्तानगंज तहसील क्षेत्र के गांव सिधावट के तीन कामगार दुबई में फंसे हैं। इनसे बहुत मुश्किल से बात हो पा रही है। दुबई के सोनापुर में फंसे सिधावट गांव निवासी रामनेत सिंह की पत्नी आरती देवी ने बताया कि पति ने होली में आने के लिए फ्लाइट की टिकट की थी लेकिन रद्द होने से अब नहीं घर नहीं आ सकेंगे। बेटे के फंसे होने से नींद नहीं आ रही है। अब तो सिर्फ सरकार से गुजारिश है कि पति की सकुशल वतन वापसी हो जाए।
सिधावट गांव निवासी सुनीता देवी ने कहा कि पति बृजेश सिंह दुबई में हैं। ईरान-इस्राइल युद्ध शुरू होने के चलते बात बहुत कम हो हो पा रही है। होली में घर आने के लिए टिकट कराए थे,लेकिन युद्ध के चलते हवाई सेवाएं बंद हैं, इसलिए वापसी पर अनिश्चितता दिखाई दे रहा है।
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दुबई में ही फंसे गणेश गुप्ता के पिता शंभू गुप्ता ने कहा कि महीनों पहले बेटे ने होली पर्व को मनाने के लिए हवाई टिकट कराई थी, लेकिन युद्ध होने की के बाद उसने बताया है कि अब घर नहीं आ पाएंगे। जब युद्ध पर विराम लगेगा तब ही कुछ संभव हो सकता है।
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घरों में पसरा सन्नाटा, बस सलामती की दुआ
जिले के गांवों और कस्बों में स्थिति और गंभीर है। घरों के चूल्हे तो जल रहे हैं, लेकिन भोजन का स्वाद गायब है। परिजनों का कहना है कि जब बेटा या पति सुरक्षित नहीं लौट आते, तब तक न तो गुलाल उड़ेगा और न ही सेंवई मीठी लगेगी। अब तो सिर्फ अपनों के खाड़ी देशों से सुरक्षित वापस होने की दुआ कर रहे हैं।
दुदही क्षेत्र के ठाढ़ी भार गांव निवासी उमेश पांडेय ने बताया कि उनके बेटे अशोक पांडेय ओमान में एक कंपनी में तैनात हैं। चल रहे युद्ध के चलते कंपनी में काम बंद हो गया है। सहयोगियों क साथ बंकर में छिपे हुए हैं। इधर से बात नहीं हो पा रही, लेकिन बेटे का फोन उधर से आ रहा है। अब सिर्फ ईश्वर से यही प्रार्थना है कि बेटे की सकुशल वतन वापसी हो जाए। फोन उधर से सिर्फ आने की वजह सुरक्षा कारण बताया है।
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जिला प्रशासन अलर्ट, परिजनों से मांगी जानकारी
जिला प्रशासन ईरान-इस्राइल के बीच संघर्ष को लेकर जिले के फंसे कामगारों की जानकारी जुटाने में जुट गया है। इसके लिए खाड़ी देशों में फंसे कामगारों के परिजनों से उनकी पूरी जानकारी मांगी गई है। जिसे परिजन अपने क्षेत्र के लेखपाल को दें, ताकि फंसे लोगों की जानकारी शासन स्तर तक पहुंचाया जा सके।
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कोइलसवा बुजुर्ग गांव के दुबई में फंसे हैं लोग
बनकटा बाजार। चौरा खास थाना क्षेत्र के कोइलसवा बुजुर्ग निवासी योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि खाड़ी देशों में गांव के कामगार फंसे हैं। वहां रोजी-रोटी के लिए कंपनियों में काम करने गए हैं। दुबई में फंसे त्रिलोकीनाथ राजभर से हुई बात में जानकारी मिल रही है कि जहां कंपनी ने रखा है, वहां से कुछ दूर ही बमबारी व मिसाइलों से वार हो रहे हैं। बम की आवाज व गर्जना से रात में नींद नहीं आ रही है।
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सऊदी में फंसे हैं अमित सिंह
नदवाविशुनपुर गांव निवासी अमित सिंह होली पर वतन वापस आने वाले थे, लेकिन युद्ध के चलते वह अब नहीं आ पा रहे हैं। इसको लेकर भाई सत्यम सिंह ने कहा कि फोन से बात हो रही है। लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। पल-पल की गतिविधि जानने को लेकर टीवी व एंड्रायड मोबाइल ही सहारा बना हुआ है।
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हवाई सेवा रद्द, पहुंचे थे मुंबई
पडरौना शहर के गड़रु नगर निवासी सुनील शुक्ला ने सऊदी जाने के लिए मुंबई पहुंचे थे, लेकिन अचानक 28 फरवरी को ईरान-इस्राइल के बीच युद्ध शुरू होने से हवाई सेवाएं बंद हो गईं, तो वह जाने से वंचित रहे गए। उन्होंने बताया कि अब तो दोनों देशों के बीच जब तक युद्ध विराम नहीं हो जाता, तब तक देश में ही रहना होगा।