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Deoria News: मिठाइयों की चमक पर न जाएं...सोच-समझकर करें खरीदारी

Tue, 03 Mar 2026 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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चांदी वर्क से बनी मिठाई।संवाद - फोटो : Samvad
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पडरौना। धार्मिक श्रद्धा और आपसी भाईचारे का पर्व होली को लेकर बाजारों में रंग अबीर और गुलाल के साथ मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स की मांग भी बढ़ गई है। खुशियों के इस पर्व को लेकर बाजार भी सज गए हैं। वहीं, मिठाइयों की दुकानों पर तरह-तरह की मिठाइयां उपलब्ध हैं। लोगों की मांग को पूरा करने के लिए बाहर से भी कई तरह की मिठाइयों की खेप मंगाई जा रही है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए जिस तरह से बाजारों में कई तरह की आकर्षक मिठाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। उसी तरह से कई तरह के रंगों से सजी और चांदी का वर्क लगी मिठाइयां बाजारों में पहुंच रही हैं।
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जानकारों का कहना है कि मिलावटखोर सिल्वर की जगह एल्युमिनियम और क्रीम की जगह फ्रोजन क्रीम का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में पूरी तरह जांच परखकर ही मिठाइयां खरीदें। जरा सी चूक आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। हालांकि, त्योहारी सीजन में खाद्य विभाग अलर्ट है। जगह-जगह मिठाइयों की दुकानों में दबिश देकर सैंपल एकत्र कर रहा है। साथ ही बाहर से आ रही मिठाइयों भी नजर रखी जा रही है।
चांदी के वर्क लगी व ज्यादा रंगदार मिठाइयां ग्राहकों को भी आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि ज्यादातर मिठाइयों को चांदी के वर्क से सजाकर रखा जाता है। सिल्वर फायल या चांदी का वर्क आयुर्वेदिक मेडिसिन का सदियों पुराना हिस्सा रहा है और खाने की सामग्री को सजाने के लिए इसका इस्तेमाल होता रहा है। यह खूबसूरत चांदी का वर्क हमेशा चांदी ही नहीं होता, बल्कि आजकल सिल्वर जैसे दिखने वाले कई टाॅक्सिक मेटल भी बाजार में आ गए हैं। मिठाइयों को सजाने में इन टाॅक्सिक मेटल का इस्तेमाल हो रहा है।
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मिठाइयों और खाने की चीजों को सजाने के लिए जिन सिल्वर लीफ का इस्तेमाल होता है। उनमें अक्सर सिल्वर के नाम पर एल्यूमीनियम व कई तरह के नुकसानदायक तत्वों का इस्तेमाल होता है, जो सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक हैं। जानकार बताते हैं कि असली सिल्वर वर्क बेहद पतला और महंगा होता है। इसकी कीमत अधिक होने के कारण धंधेबाज एल्युमिनियम की शीट को मिठाइयों पर चिपका देते हैं। देखने में यह चांदी जैसा ही चमकदार दिखता है, जिससे आम ग्राहक आसानी से धोखा खा जाता है।
वहीं क्रीम की जगह कई जगह फ्रोजन व व्हिपिंग पाउडर आधारित बनावटी क्रीम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कृत्रिम रंग व फ्लेवर मिलाए जाते हैं। ये दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। काजू बर्फी पर सबसे अधिक एल्युमिनियम वर्क का प्रयोग हो रहा है। गुलाब जामुन और छेना से बनी कुछ मिठाइयों पर भी इस तरह के वर्क का इस्तेमाल करते हैं। ठेलों पर बिकने वाली मिठाइयों पर भी इसका प्रयोग होता है।

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एल्युमिनियम वर्क से छिप जाते हैं मिठाई पर लगे धब्बे
पडरौना। वैसे तो मिठाई के सभी दुकानों पर सिल्वर की वर्क लगी मिठाइयां दिख जाती हैं। लेकिन उसकी खरीदारी करते समय लोगों को बेहद ही सतर्क रहना चाहिए। क्योंकि एल्युमिनियम वर्क के प्रयोग से मिठाई की गुणवत्ता तो प्रभावित होती है, उनके खराब हिस्से को भी उसी से छिपाया जाता है। बाजार के जानकार बताते हैं कि जिन मिठाइयों को खराब होने के बाद कारीगर तोड़कर दोबारा बनाते हैं, उस पर एल्युमिनियम की यह चमकदार परत सबसे अधिक होती है। वजह यह कि इन परत के नीचे मिठाई पर पड़ने वाले दाग, धब्बे आसानी से छिप जाते हैं। संवाद

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इन दिनों सिल्वर के नाम पर एल्युमीनियम का यूज होता है, जो सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। खराब क्वालिटी के सिल्वर का इस्तेमाल भी कई जगहों पर किया जाता है। अनहाइजीनिक तरीके से मिठाइयों में इसे लगाया जाता है। कई बार इसमें निकिल, लेड जैसे खतरनाक तत्व भी मिले होते हैं। इससे कई तरह की खतरनाक बीमारियां होने का खतरा रहता है। - प्रवीण कुमार राव, डीएम गैस्ट्रो।

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बाहर से आ रही मिठाइयों की खेप पर भी कड़ी नजर रख जा रही है। मिठाई विक्रेताओं को सफाई के साथ उचित गुणवत्ता के भी निर्देश दिए हैं, ताकि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो सके। जांच के दौरान यदि सिल्वर वर्ग की जगह एल्यूमीनियम वर्ग लगाने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की लापरवाही करने वालों पर जेल और जुर्माना दोनों किया जाता है। यदि कहीं मिलावट या एल्युमिनियम वर्क लगा मिठाई मिलने की सूचना हो तो विभाग को सूचित करें। तत्काल कार्रवाई की जाएगी। -प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त खाद्य, द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग।
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